माहे मोहर्रम के एक माह पूरे -इस्लामिक माह सफर की हुई शुरुआत

( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। दो माह और आठ दिनो तक जारी रहने वाले ग़मे हुसैन और करबला के शहीदों का ग़म मनाने का सिलसिला जारी है। माहे मोहर्रम के एक माह पूरे हो गए।इसलामिक माह सफर उल मुरज्जब का चाँद बुधवार को दिखाई देने की तसदीक़ होने के साथ माहे सफर मे एक बार फिर से अशरा ए मजालिस का दौर तेज़ हो गया। दरियाबाद इमामबाड़ा स्व अली अहमद ज़ैदी मे सालाना मजलिस हुई।मौलाना जवादुल हैदर रिज़वी ने मजलिस को खेताब करते हुए हज़रत इमाम हुसैन व अन्य शहीदों की राहे हक़ मे दी गई अज़ीमुश्शान क़ुरबानी का ज़िक्र किया।करबला के शहीदो पर यज़ीदी सेना द्वारा ढाए गए ज़ुल्म की दास्ताँ बयान की।ईशान कोरालवी ने ग़मगीन मर्सिइया पढ़ा।वहीं शायर रौनक़ सफीपुरी के आवास पर सालाना मजलिस का आयोजन किया गया। नजीब इलाहाबादी के संचालन मे हुई मजलिस मे डॉ फाज़िल हाशमी ने मर्सिया पढ़ा।अन्जुमन नक़विया रजिस्टर्ड के नौहाख्वान शबी हसन अब्बास शानू नक़वी,मंज़र नक़वी आदि ने पुरदर्द नौहा पढ़ा।वहीं करैली इबादतखाने मे हुई मजलिस को मौलाना सै० रज़ी हैदर ने खिताब किया।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया बख्शी बाज़ार के नौहाख्वान शादाब ज़मन शबीह अब्बास,अखलाक़ रज़ा,ऐजाज़ नक़वी,ज़हीर अब्बास कामरान रिज़वी अज़ीम अकबर,सोनू,हैदर रिज़वी,अब्बास रिज़वी आदि ने शायर तालिब इलाहाबादी व शायर ज़मीर भोपतपूरी का लिखा नौहा पढ़ा।करैली मसूद साहब के अज़ाखाने पर नौचन्दी जुमेरात का जुलूस न निकालते हुए इमामबाड़े के अन्दर ही मजलिस आयोजित की गई।शबीहे ताबूत ज़ुलजनाह व अलम की ज़ियारत कराई गई।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया ने नौहा और मातम का नज़राना पेश किया। सभी मजलिसों मे बड़ी संख्या मे लोगों ने शिरकत करते हुए ग़मे हुसैन मे गिरया ओ ज़ारी करते हुए मातम किया। हसन नक़वी ,क़िबला नक़वी , शीराज़ रिज़वी सै०इफ्तेखार हुसैन मशहद अली खाँ ,सज्जाद मोमिन , ताहिर मलिक ,ज़ामिन हसन ,अब्बास ज़ैदी ,शौकत भारतीया ,आबिद अली ,अबुल हसन ज़ैदी , नक़ी ज़ैदी ,औन ज़ैदी ,जौन ज़ैदी असद सामिन काशिफ आदि शामिल रहे।

Exit mobile version