शांति हमारी सहज साधना युद्ध हमारा प्राण है – महंत जगतार मुनि

ऋषि और संतों के त्याग तपस्या और बलिदान के कारण ही भारत के संस्कृति सुरक्षित है- गणेश केसरवानी

पंचायती नया उदासीन अखाड़ा निर्वाण के द्वारा मनाई गई भगवान श्री चंद्र मुनि जी की 527 वीं जयंती

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। मुट्ठीगंज हटिया स्थित पंचायती नया उदासीन अखाड़ा निर्माण के के द्वारा भगवान श्री चंद्र मुनि जी महाराज की 527 वी जयंती उदासीन संप्रदाय के परंपरा के अनुसार मनाई गई इस अवसर पर अखाड़े के महंत जगतार मुनि जी के द्वारा भगवान श्री चंद्र जी महाराज जी को गंगा एवं पंचामृत स्नान करा कर उनका भव्य श्रृंगार करते हुए परंपरा के अनुसार पूजन अर्चन करते हुए जन्म जयंती मनाई गई । इस अवसर पर उन्होंने उनके जीवन वृत्त पर दर्शन डालते हुए कहा कि भगवान श्री चंद्र मुनि जी महाराज गुरु नानक जी के जेष्ठ पुत्र थे। जिन्होंने उदासीन संप्रदाय की स्थापना की थी उनके जन्म के समय से ही शरीर पर विभूति की एक पतली परत तथा कानून में मांस के कुंडल बने थे। इसलिए लोग उन्हें भगवान शिव का अवतार मानने लगे और कहा कि जिस अवस्था में बालक खेलकूद में व्यस्त रहते हैं उस अवस्था में श्री चंद्र जी एकांत में समाधि लगा कर बैठ जाते थे।उन्होंने अपने जीवन काल में धर्म के प्रचार के लिए लोगों की सेवा के लिए परमार्थ की सेवा के लिए राष्ट्र और संस्कृति के लिए तिब्बत कश्मीर सिंधु काबुल कंधार बलूचिस्तान अफगानिस्तान गुजरात पुरी कटक गया आदि क्षेत्रों में जाकर सनातन धर्म का प्रचार किया और लोगों की सेवा की उनका संपूर्ण जीवन त्याग और तपस्या राष्ट्र की संस्कृति के प्रति समर्पित रहा। इस अवसर पर उन्होंने समाज को संदेश देते हुए कहा कि सनातन धर्म की सुरक्षा के लिए हमें भारत के बच्चे बच्चे को जागृत करना होगा और कहा कि हमारा देश शांति प्रिय देश है जब भी हमारे देश की शांति प्रेम सौहार्द और भारतीय संस्कृति पर यमनो के द्वारा प्रहार किया गया तब तब हमारे देश के साधु संन्यासियों ने अपने आप को बलिदान करके उनका विनाश किया है। उन्होंने कहा कि हमारे शास्त्र हमें सिखाते हैं कि शांति हमारी सहज साधना युद्ध हमारा प्राण है इसलिए धर्म संस्कृति और राष्ट्र की संस्कृति के लिए हमें सदैव जागृत रहना चाहिए। इस अवसर पर कार्यक्रम में भाजपा महानगर अध्यक्ष गणेश केसरवानी ने धर्म ध्वजा का पूजन कर उसे फहराते हुए और संतों का सम्मान करते हुए कहा कि हमारे ऋषि-मुनियों और संतों का संपूर्ण जीवन देश समाज और राष्ट्र की संस्कृति के लिए और मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा है और जब जब इस देश के अंदर सनातन धर्म और उसके अनुयायियों देवी-देवताओं के प्रति प्रहार किए गए तब तक संत समाज को एक करके आंदोलन करके अपने धर्म को सुरक्षित करने का कार्य किया है जिसका जीता जागता उदाहरण है श्री राम जन्मभूमि के स्थान पर आज 500 वर्षों की लड़ाई के पश्चात भगवान श्री राम के जन्म स्थान पर भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा है। कार्यक्रम का संचालन राजेश केसरवानी ने किया। इस अवसर पर कुमार नारायण संतोष अग्रहरी बसंत लाल आजाद सुशील चंद्र बच्चा किशोरी लाल जायसवाल अजय अग्रहरि भरत जायसवाल अभिलाष केशरवानी विकासशील अनूप सर्वेश विक्रम अनुराग प्रकाश मनीष गोलू धीरेंद्र शुभम कुलदीप राजू पाठक विवेक अग्रवाल गिरजेश मिश्रा आज सैकड़ों भक्त गण उपस्थित रहे।

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