त्याग आत्मा को स्वस्थ एवं सुंदर बनाता है। त्याग का संस्कार हमें प्रकृति से मिलाता है

( विनय मिश्रा )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। ज़ीरो रोड स्थित जैन मंदिर में दसलक्षण पर्व के आठवें दिन जैन धर्म के अनुयायियों ने उत्तम त्याग धर्म का पालन किया। केसरिया वस्त्रो में श्रावक, श्राविकाओं ने भगवान की शांति धारा, अभिषेक कर संगीतमयी धुनों पूजन अर्चन कर भक्ति नृत्य किया जिससे सारा वातावरण भक्तिमय हो गया। पंडित जी ने बताया केसरिया रंग पवित्रता का प्रतीक है, उन्होंने कहा कि हमे पूजन एवं पवित्र एवं शुद्ध मन से करना चाहिए तभी हमें उसका फल मिलता है। पंडित सुनील जैन उत्तम त्याग धर्म पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उत्तम त्याग धर्म के बारे में बताते हुए कहा त्याग आत्मा को स्वस्थ एवं सुंदर बनाता है। त्याग का संस्कार हमें प्रकृति से मिलाता है। उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे वृक्ष में पत्ते आते है और झड़ जाते है, फल लगते है और गिर जाते है, गाय अपना दूध स्वयं छोड़ देती है। यह सभी उदाहरण हमें प्रेणा देते है कि हमारा जन्म दूसरों की सेवा एवं हित करने लिए ही ईश्वर ने किया है। सायंकालीन सामूहिक आरती, भजन , पंडित सुनील जैन द्वारा शास्त्र प्रवचन एवं धार्मिक अंताक्षरी का आयोजन किया गया। जिसमे बच्चों एवं बड़ों ने उत्साह पूर्वक भाग लिया। जैन महिला मंडल समिति ने प्रथम, द्वितीय एवं तृतयी प्रतिभागियो को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से बाला जैन, संगीता जैन, सुनीता जैन, खुशबू जैन, चारु जैन, दीपाली जैन, रवि जैन,
यश जैन आलोक रपरिया, राजेश जैन, आदित्य जैन, राहुल जैन, दीपक जैन आदि मौजूद रहें।

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