सुर्ख़ियों में रहा गुरु-शिष्य का विवाद

( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार)। बीते कुछ समय से महंत नरेंद्र गिरी विवादों में थे। उनका अपने शिष्य आनंद गिरि से विवाद काफी सुर्खियों में रहा। दोनों तरफ से जमकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। बाद में दोनों को जानने वाले कुछ लोगों ने मध्यस्थता कर इनके बीच समझौता करा दिया। तब हरिद्वार से प्रयागराज आये आनंद गिरी ने पैर छूकर गुरु से माफी मांगी।उस वक्त आनंद गिरि ने पंच परमेश्वरों से भी माफी मांगी थी और कहा था कि उनके द्वारा सोशल मीडिया, समाचार पत्रों, टीवी चैनलों पर जो भी बयान जारी किए गए उन्हें भी वह वापस ले रहे हैं। इसके बाद महंत नरेंद्र गिरी ने भी आनंद गिरी पर लगाए गए आरोपों को वापस लेते उन्हें माफ कर दिया।

आखड़ा परिषद ने किया था हस्पक्षेप

गुरु-शिष्य के बीच बढ़ते विवाद को देखकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने भी हस्तक्षेप किया था और दोनों के बीच समझौता कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसके बाद गुरु पूर्णिमा के दिन आनंद गिरि अखाड़े में अपने गुरु की पूजा कर सके थे। अखाड़े और मठ में उनके प्रवेश पर लगाई गई रोक भी हटा ली गयी थी। हालांकि, आनंद गिरी का अखाड़े से निष्कासन वापस हुआ या नहीं यह स्पष्ट नहीं हो सका था।

14 मई को अखाड़े से बाहर किये गये थे आनंद गिरि

14 मई 2021 को पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी ने आनंद गिरी को अखाड़े और बाघंबरी गद्दी से बाहर कर दिया था। उन पर अपने परिवार से संबंध रखने का आरोप लगा था।
नरेंद्र गिरि ने कहा था कि बड़े हनुमान मंदिर पर आने वाले दान-चढ़ावे में से आनंद गिरि धन अपने परिवार पर खर्च कर रहे हैं। असके बाद अखाड़े के पंच परमेश्वरों की सहमति के बाद आनंद गिरी पर यह कार्रवाई की गई थी।

आनंद गिरि ने गुरु पर करोड़ों की जमीन बेचने का लगाया था आरोप

अखाड़े से बाहर होने के बाद आनंद गिरि ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज कर दिया था और अपने गुरु नरेंद्र गिरि पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। इनमें सबसे गंभीर आरोप मठ की करोड़ों रुपए की जमीनों को बेचने और उन रुपयों का दुरुपयोग करने का था।
आनंद ने कहा था कि उनके गुरु नरेंद्र के कई बड़े और महंगे शौक हैं। इन शौक को पूरा करने के लिए नरेंद्र गिरि मठ के धन का दुरुपयोग कर रहे हैं। आनंद ने मठ के कई सेवादारों के परिवारों पर भी करोड़ों रुपया खर्च करने का आरोप नरेन्द्र गिरि पर लगाया था। इसके बाद गुरु और चेले के बीच विवाद गहरा गया था।

मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को लिखी थी चिट्‌ठी

नरेंद्र गिरी ने भी आनंद गिरि पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। इसके बाद आनंद गिरि ने अपने गुरु के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। उन्होंने मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति को पत्र लिखकर इस मामले में हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई थी और अपनी जान का खतरा भी बताया था।

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