
(अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। शाहगंज इमामबाड़ा सफदर अली बेग मे हय्या अला खैरिल अमल तन्ज़ीम की ओर से बच्चों की शब्बेदारी का आयोजन किया गया।ज़हीर अब्बास व साथियों ने मर्सियाख्वानी की।मौलाना रज़ा अब्बास ज़ैदी ने मजलिस को खेताब करते हुए करबला के बहत्तर शहीदों की क़ुरबानी का मार्मिक अन्दाज़ मे ज़िक्र किया।अम्मार इलाहाबादी की निज़ामत (संचालन) मे दरियाबाद व रानी मण्डी की बच्चों की अन्जुमनों ने रात भर पुरदर्द नौहा पढ़ कर माहौल को ग़मज़दा बनाए रखा।अन्जुमन हुसैनिया क़दीम खुर्द अनजुमन मोहाफिज़े अज़ा खुर्द ,अन्जुमन हाशिमया खुर्द ,अन्जुमन शब्बीरिया खुर्द , अन्जुमन असग़रिया खुर्द अन्जुमन मज़लूमिया खुर्द के साथ अन्जुमन अब्बासिया ने भी नौहा और मातम करते हुए हुसैन ए मज़लूम की शहादत पर गिरया ओ ज़ारी करते हुए बच्चों की शब्बेदारी मे शिरकत की।शब्बेदारी मे खुसूसी नौहाख्वान रहबर इलाहाबादी ने भी खास नौहा पढ़ा।हज़रत इमाम हुसैन के वफादार घोड़े ज़ुलजनाह की शबीह गुलाब और चमेली के फूलों से सजा कर और ग़ाज़ी अब्बास का अलम भी शब्बेदारी मे रात भर ज़ियारत कराने को सजा कर निकाला गया।बच्चों की शब्बेदारी का आयोजन करने वालों मे सैफ फैज़ मोहम्मद सलमान हैदर सादिक़ अलमास औसजा ,आमिर आदि शामिल रहे।
*हज़रत इमाम हुसैन का चेहलुम 28 सितम्बर को-अशरा ए अरबईन मे घर घर मे बिछी है फरशे अज़ा*
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। करबला के शहीदों की याद मे दो माह और आठ दिनों तक जारी रहने वाले अय्यामे अज़ा का दौर बदसुतूर जारी है। कहीं पुरुषों तो कहीं महिलाओं की मजलिसे लगातार हो रही हैं।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के प्रवक्ता सै०मो०अस्करी के अनुसार हज़रत इमाम हुसैन व अन्य करबला के शहीदों का चेहलुम (20 सफर) 28 सितम्बर को मनाया जायगा। इन दिनो यौम ए अरबईन के सिलसिले मे दस दिवसीय मजलिस मे ज़िक्र ए शोहदाए करबला और नौहा और मातम ज़ोर शोर से जारी है।इमामबाड़ा नवाब आज़म हुसैन रानी मण्डी में 11 सफर से 19 सफर तक मजलिसों का दौर चल रहा है। वहीं दरियाबाद , रानीमण्डी करैली ,बख्शी बाज़ार ,दायरा शाह अजमल बैदन टोला ,शाहगंज ,बरनतला आदि इलाको मे लगातार मजलिसों मे ज़िक्र ए शोहदाए करबला हो रहा है।दायरा शाह अजमल इमामबाड़ा स्व हसन अस्करी मे महिलाओं की दस दिवसीय मजलिस मे मोख्तलिफ महिला ज़ाकिरा मजलिस को खेताब कर रही हैं।वहीं शहर की मशहूर महिला व बच्चीयाँ ग़मगीन सोज़ सलाम व नौहों और मातम का नज़राना पेश करते हुए हज़रत इमाम हुसैन की शहादत का पुरसा जनाबे फात्मा ज़हरा को दे रही हैं।