
दो बार बलवीर गिरि का नाम जबकि एक बार आनंद गिरि का
दर्ज है
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद अध्यक्ष महंत नरेंद्र गिरि ने अपनी वसीयत तीन बार बदली है। उसमें दो बार बलवीर गिरि का नाम दर्ज है, जबकि एक बार आनंद गिरि को उत्तराधिकारी बनाया था। महंत नरेंद्र गिरि की वसीयत लिखने वाले अधिवक्ता ऋषिशंकर द्विवेदी बताते हैं कि महंत नरेंद्र गिरि ने चार जून 2020 को बलवीर गिरि के नाम अंतिम वसीयत लिखवाई थी, जिसमें उन्होंने बलवीर को अपना उत्तराधिकारी बताया है। अब यह नई जानकारी सामने आई है जिसके बारे मेंं पंच परमेश्वर को अवगत कराया गया है। अब देखने वाली बात यह है कि अखाड़ा के नियमों के तहत पंच परमेश्वर किसकी ताजपोशी मठ के महंत और मंदिर व्यवस्थापक पद पर करते हैं।
सुसाइड नोट में भी बार-बार बलवीर का नाम
महंत नरेंद्र गिरि चार रोज पहले 20 सितंबर की शाम अल्लापुर में श्री मठ बाघम्बरी गद्दी में मृत मिले थे। मठ के अतिथि कक्ष में उनके शव को पंखे में बंधे फंदे को काटकर उतारा गया था। पुलिस अधिकारी इसे फांसी लगाकर आत्महत्या कहने लगे क्योंकि वहीं 12 पन्ने का सुसाइड नोट भी मिला था। हालांकि पुलिस को मिला यह सुसाइड नोट मीडिया तक अगले रोज पहुंचा जब उसे किसी ने इंटरनेट मीडिया पर वायरल कर दिया। सुसाइड नोट बलवीर गिरि को संबोधित करके लिखा गया था और उसमें उन्हें उत्तराधिकारी बनाने की बात लिखी है। नरेंद्र गिरि की वसीयत लिखने वाले अधिवक्ता ऋषिशंकर द्विवेदी बताते हैं कि महंत नरेंद्र गिरि ने चार जून 2020 को बलवीर गिरि के नाम अंतिम वसीयत लिखवाई थी, जिसमें उन्होंने बलवीर गिरि को अपना उत्तराधिकारी बताया है।