प्रकृति से जितना लो उसे वापस करो: राज्यपाल आरिफ

गंगा के नाम पर अरबों खर्च, भ्रष्टाचारियों का सजा नहीं: न्यायमूर्ति

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। अधिवक्ताओं की संस्था यंग लॉयर्स एसोसिएशन के बैनरतले शनिवार को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र में ‘मोक्षदायिनी मां गंगा की अविरल एवं निर्मल धारा व संरक्षा’ पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि विषय ऐसा है कि विशेषज्ञ होने का दावा नहीं है। मां गंगा पर कहा कि प्रकृति से जितना लो, उसे वापस भी करो। इसके लिए संकल्प लेना होगा कि ‘गंगा को न गंदा करेंगे और न किसी को करने देंगे’। राज्यपाल ने कहा कि मां गंगा के बारे में आज इतने ज्ञानप्रद तथ्यों की जानकारी मुझे मिली। मेरे लिए आज का दिन महत्वपूर्ण है। जबकि गंगा किनारे ही रहता हूं। उन्होंने कहा कि कानपुर से पार्लियामेंट में प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला और कुल मिलाकर पांच बार गंगा के मुद्दे को लोकसभा में उठाया था। उन्होंने कहा कि गंगा नदी के जल की पवित्रता और उसकी आध्यात्मिक शुचिता पूरे विश्व की मानवता को अपने उपकार से जोड़ सकती है। हमारे भारत में ज्ञान व संवर्धन बहुत है, इसीलिए भारत सभी देशों से आगे है।
उन्होंने केरल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां 15 विश्वविद्यालय हैं और जब छात्रों को सर्टिफिकेट दिया जाता है तो पहले एफीडेविट लिया जाता है कि ‘दहेज न लेंगे और न देंगे’। जिससे दहेज प्रथा वहां नहीं है। इसी प्रकार महिलाओं पर होने वाले अपराध पर कहा कि वहां 18 कानून बने हैं और किसी महिला पर अत्याचार होता है तो पुलिस तुरन्त सक्रिय होती है और कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि वहां महिलाओं की पहले सुनी जाती है, कोई भी महिला बेधड़क थाने जाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है। उन्होंने बताया कि अब तो शिकायत के लिए जगह-जगह बूथ बनाये जा रहे हैं। जहां महिलाएं जाकर एक मशीन पर क्लिक करेंगी तो उसकी फोटो सहित सीधे थाने में वार्ता होगी और कार्यवाही में तेजी आयेगी। अंत में कहा कि यह विशेषज्ञों का मामला है, ज्यादा नहीं कह सकता। अध्यक्षता करते हुए सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति एवं वर्तमान में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के सदस्य सुधीर अग्रवाल ने कहा कि मां गंगा की अविरलता के लिए जो जगह चुनी गयी, वह इससे अच्छा कहीं नहीं हो सकता। गंगा को हम मां का दर्जा देते हैं, लेकिन सभी ने उसे प्रदूषित कर दिया और कहते हैं कि गंगा प्रदूषित है। इसे गंदा ना करो, सब अपने आप सही हो जायेगा। उन्होंने कहा कि गंगा में सबसे ज्यादा प्रवाहित होने की क्षमता है। लेकिन हरिद्वार में भीमगारा बैराज बना कर पानी सिंचाई के लिए ले लिया जाता है। वहीं से धारा कम हो गयी। इसके बाद तीन बैराज नरौरा में बना है। जहां 10,665 क्यूसेक पानी निकाला जाता है। कानपुर में पानी निकाला जाता है। अब पानी नहीं होगा तो गंगा स्वच्छ कैसे होगी। उन्होंने कहा कि बैराज बना कर पानी सिंचाई के लिए लेना ठीक है, लेकिन इसकी मात्रा निर्धारित नहीं है। कहा कि प्रकृति से मानव को उतना ही लेना चाहिए जितना वापस कर सके। उन्होंने कहा कि बहुत पहले केन्द्रीय प्रदूषण बोर्ड ने गंगा एक्शन प्लान वन और टू बनाया। दोनों में मिलाकर लगभग 900 करोड़ रूपये खर्च हुए। लेकिन मामला जस का तस रहा और प्रदूषण बढ़ता गया। उन्होनंे कहा कि न्यायपालिका कभी-कभी अपने को असहाय महसूस करती है। हम आदेश दे सकते हैं, लागू नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि आखिर इतना पैसा गया कहां ? अंत में कहा कि आज तक इसमें भ्रष्टाचार करने वालों को सजा नहीं हुई है।
यंग लॉयर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संतोष त्रिपाठी एवं सीनियर अधिवक्ता नरेश चंद्र राजवंशी ने कहा कि गंगा हमारे सनातन धर्म में संस्कार की जननी है। आज इसके अस्तित्व को लेकर सभी चिंतित हैं। यह संगोष्ठी पंडित मदन मोहन मालवीय को समर्पित किया गया है। हम लोगों की लापरवाही से गंगा प्रदूषित होती गयी। पैसा भी खूब आ रहा है, लेकिन सब भ्रष्टाचार में चला जा रहा है। कार्यक्रम का संचालन अधिवक्ता डॉ.संतोष जैन ने किया।

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