दु:शाहस से बाज़ आये चीन अन्यथ अपनी बर्बादी के लिए स्वयम् जिम्मेदार होगा- शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द
Anurag shukla
सम्भल (अनुराग दर्शन समाचार )। उ०प्र० के सम्भल जनपदान्तर्गत ऐचोड़ा कम्बोह गाँव में आयोजित १०० कुण्डीय श्री संकटमोचक महायज्ञ में पधारे श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनंत श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने महायज्ञ के धर्म मंच से उपस्थित सनातन धर्मावलम्बियों को अपना आशीर्वचन एवम् मार्गदर्शन प्रदान किया | इस अवसर पर पूज्य शंकराचार्य भगवान ने कहा कि यज्ञ वह कल्पबृक्ष है, जिससे मनुष्य अपनी समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति कर सकता है | यज्ञ का प्रत्यक्ष प्रभाव यह है कि इसके माध्यम से विखण्डित एवम् विभाजित समाज को सहजरूप से एक सूत्र में पिरोया जा सकता है, जोड़ा जा सकता है | जब समाज एकजुट होता है,तो दुनिया की कोई भी ताकत न तो सनातन संस्कृति, परम्परा, आस्था को कमजोर कर सकती है, और न ही भारत की तरफ अपनी कुदृष्टि डाल सकती है | यज्ञ सनातन है | यज्ञ के माध्यम से पर्यावरण की शुद्धि होती है, और शुद्ध पर्यावरण से ही शुद्ध एवम् पवित्र मानसिकता का विकास सम्भव है। पूज्य शंकराचार्य भगवान ने कहा कि आज चीन आदि हमारे पड़ोसी देशों ने हमारी सहिष्णुता को ही हमारी कमजोरी मान लिया है | चीन हमारी सीमा पर हमारी जमीन पर ६०० गाँव बसाने का षड़यंत्र कर रहा है | लेकिन चीन को यह ध्यान जरूर रखना चाहिए कि आज का भारत १९६२ का भारत नहीं, अपितु यह २०२१ का भारत है, जो न्युक्लियर ताकत से सम्पन्न है | चीन अपने हित में अपने दु:शाहस से बाज़् आये, अन्यथा चीन अपनी बर्बादी के लिए स्वयम् जिम्मेदार होगा |