
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। आज तीर्थराज प्रयाग के अधिष्ठाता भगवान् श्री द्वादश माधव की परिक्रमा कर स्वयं अनुभव करें । जगत नियंता भगवान् श्री नारायण की यह पावन परिक्रमा 600 वर्षों तक स्थगित रहने के बाद 8 वर्ष पूर्व पुनः पुनर्जीवित की गयी है। यह विचार आज पांच दिवसीय द्वादश माधव वार्षिक परिक्रमा के चौथे दिन आध्यात्मिक गुरु स्वामी श्री अशोक जी महाराज द्वारा व्यक्त किये गए । चौथे दिन आज परिक्रमा यमुना जी के मध्य भगवान् श्री पद्म माधव पीठ पहुंची और भगवान् की परिक्रमा की , तत्पश्चात परिक्रमा यात्रा ददरी ग्राम स्थित भगवान श्री गदा माधव पीठ पहुंची।परिक्रमावासियों ने ग्राम ददरी मे भगवान के मूल स्थान पर गत वर्ष बने ने नए पीठ एवं गत वर्ष ही स्थापित नई प्रतिमा की ही परिक्रमा की गई। यहा उल्लेखनीय है । कि छिवकी रेलवे स्टेशन के ठीक पीछे बना स्थान मूल स्थान नहीं है। पिछले वर्ष “भगवान श्री द्वादश माधव परिक्रमा आयोजन समिति” के वर्षों के शोध के आधार पर नए स्थान का चयन करके जो कि मूल स्थान है, पर भगवान का नया मंदिर एवं प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई है। गत वर्ष से ही यही स्थान परिक्रमा के लिए प्रामाणिक स्थान धोषित किया गया है। यह वही स्थान है जहां भगवान श्री राम, भ्राता लक्षमण एवं माता जानकी के साथ एक रात रूके थे। पांचवे एवं अन्तिम दिन अर्थात कार्तिक पूर्णिमा 18 नवम्बर को परिक्रमा सर्वप्रथम भगवान् भगवान श्री आदि माधव और भगवान् श्री चक्र माधव अरैल जायेगी । जहां महाप्रसाद के बाद इस वर्ष की परिक्रमा समाप्त हो जाएगी। परिक्रमा यात्रा में आध्यात्मिक गुरू अशोक महाराज, महंथ अवधेश महाराज महंथ चक्र माधव ,आदित्य महाराज ,महंथ अनंत माधव पीठ ,महंथ ज्ञानेन्द्र जी,अनन्त ब्रम्हचारी एवं तीर्थराज पाण्डेय सहित सैकड़ो भक्तों ने भाग लिया।