राहुल पाल व श्यामली सिंह पर रहेगी निगाह
तैयारियां पूरी, एथलीटों के आने का सिलसिला शुरू
( अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। 36वीं अखिल भारतीय इंदिरा मैराथन की तैयारियां पूरी कर ली हैं। इसमें भाग लेने के लिए देश के कोने कोने से एथलीटों का आना शुरू हो गया है। 42.195 किलोमीटर की इस मैराथन में करीब 1000 एथलीट्स भाग लेंगे। इस बार की मैराथन दौड़ में भी सेना के धावकों पर निगाहें रहेंगी। 2019 की इंदिरा मैराथन के पुरुष वर्ग के विजेता रहे राहुल पाल व श्यामली सिंह पर इस बार भी जीत दर्ज करने का दबाव रहेगा।
*क्या अपना ही रिकार्ड तोड़ पाएंगे श्यामली व राहुल*
इंदिरा मैराथन में कुछ खिलाड़ी ऐसे हुए हैं जिन्होंने 6-6 बार इंदिरा मैराथन पर विजय हासिल की है। इनमें पुरुष वर्ग में भैरो सिंह लोने व महिला वर्ग में ज्योति शंकर गवते शामिल हैं। ज्योति शंकर गवते ने 2013 से लेकर 2019 तक लगातार इंदिरा मैराथन में प्रथम स्थान हासिल कर अपना दमखम साबित किया। इंदिरा मैराथन 2012 की विजेता रहीं ज्योति सिंह ने उन्हें 3 साल लगातार टक्कर दी और दूसरे स्थान पर रहीं, लेकिन ज्योति शंकर को वह हरा ना सके । 2015 की इंदिरा मैराथन के बाद ज्योति सिंह ने फिर भाग नहीं लिया। ज्योति शंकर गवते ने 2013 की मैराथन में 3 घंटे 7 मिनट 24.8 सेकंड का समय निकाला था। दूसरे स्थान पर रहीं ज्योति सिंह ने 3 घंटे 9 मिनट व 6.9 सेकेंड का समय निकाला था। हालांकि 2015 के इंदिरा मैराथन में ज्योति शंकर गवते ने अपने ही रिकार्ड को तोड़ दिया और 2 घंटे 52 मिनट और 48 सेकेंड का समय निकालकर अपना लोहा मनवा दिया। दूसरे स्थान पर रहीं ज्योति सिंह 3 घंटे 6 मिनट और 15 सेकेंड में दौड़ पूरी कर सकीं। अब ऐसे में पिछली मैराथन के विजेताओं पर जीत का दबाव रहेगा। सभी की निगाहें उन्हीं पर रहेंगी।
*लगातार पांच बार चैंपियन रहे भैरो सिंह लोने*
पुरुष वर्ग में 2000 की इंदिरा मैराथन में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले भैरव सिंह लोने ने पांच बार लगातार इंदिरा मैराथन के प्रथम स्थान पर कब्जा बरकरार रखा। 2004-2005 की इंदिरा मैराथन तक उन्होंने प्रथम स्थान हासिल कर अपनी फिटनेस और दमखम का लोहा मनवाया। 2005-06 में वो केसी रामू से हार गए और दूसरे स्थान पर रहे। अगली साल 2006-2006 में उन्होंने फिर प्रथम स्थान हासिल कर लिया। इस प्रकार उन्होंने छह बार इंदिरा मैराथन में जीत हासिल की।
*सत्याभामा और स्वरूप सिंह का रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाया कोई*
इंदिरा मैराथन के महिला वर्ग में 1996-97 में प्रथम स्थान हासिल करने वाली सत्यभामा का ट्रैक रिकॉर्ड आज तक कोई महिला एथलीट नहीं तोड़ पाई। सत्यभामा ने इंदिरा मैराथन 2 घंटे 44 मिनट 40 सेकंड में पूरा कर अपने दमखम का लोहा मनवाया। सत्यभामा ने 1989-1990 में सुमन मेहता के रिकॉर्ड को तोड़कर यह कीर्तिमान हासिल किया था। सुमन मेहता ने 2 घंटे 46 मिनट 6 सेकंड में 42.195 किलोमीटर की इंदिरा मैराथन की दौड़ पूरी की थी। इसी तरह पुरुष वर्ग में 1985 में हुई प्रथम इंदिरा मैराथन दौड़ में स्वरूप सिंह का रिकॉर्ड आज तक कोई नहीं तोड़ पाया। स्वरूप सिंह ने इंदिरा मैराथन दो घंटा 21 मिनट व 18 सेकेंड में पूरी कर जो कीर्तिमान बनाया वह आज भी कायम है। मजे की बात यह है कि स्वरूप सिंह ने 1986-1987 के इंदिरा मैराथन में 1 साल पूर्व बनाए गए अपने ही रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया। उन्होंने 2 घंटा 13 मिनट 57 सेकंड में इंदिरा मैराथन की दौड़ पूरी कर एक नया कीर्तिमान खड़ा कर दिया। यह कीर्तिमान आज भी कायम है। कोई भी अथिलीट इसे तोड़ नहीं सका। 2007-2008 में राम सिंह यादव ने 2 घंटा 18 मिनट और 20 सेकेंड का समय निकालकर इस रिकार्ड को तोड़ने की कोशिश की पर असफल रहे। स्वरूप सिंह के 1986 में दो घंटे 13 मिनट और 57 सेकेंड के बनाए रिकार्ड को नहीं तोड़ सके। इस बार देखना होगा कि एथलीट कौन सा रिकार्ड बनाते हैं। कौन विजेता होगा पर रेलवे के धावक राहुल कुमार पाल के सभी की निकाहें रहेंगी।