1998 या उससे पहले नियुक्त पुलिस कर्मियों को हाईकोर्ट ने दी बड़ी राहत

कांस्टेबलों की ट्रेनिंग अवधि को सेवा में जोड़ा जाए

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। यूपी में 1998 या उससे पहले नियुक्त पुलिस कर्मियों को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शनिवार को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने शासन को निर्देश दिया है कि इन कांस्टेबलों की ट्रेनिंग अवधि को सेवा में जोड़ा जाए। साथ ही दरोगा को मिलने वाला द्वितीय प्रोन्नति वेतनमान ग्रेड-पे 4200 रुपए देने को लेकर 8 सप्ताह में आदेश पारित करें।यह आदेश जस्टिस सरल श्रीवास्तव ने 12 जिलों के कांस्टेबलों रामदत्त शर्मा और कई अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया। सिपाहियों की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम और अतिप्रिया गौतम ने बहस की। उनका तर्क था कि हाईकोर्ट के पहले के आदेशों और बाद में जारी शासनादेशों के बावजूद विभाग कुछ नहीं कर रहा। प्रशिक्षण अवधि की सेवा को द्वितीय प्रोन्नत वेतनमान देने के लिए नहीं जोड़ा जा रहा है। जबकि वे इसके हकदार हैं।याची सिपाहियों की नियुक्ति 1998 में हुई थी। लेकिन उन्हें द्वितीय वेतनमान नहीं दिया जा रहा था। न ही उनके ट्रेनिंग अवधि को सेवा में जोड़ा जा रहा था। अधिवक्ता विजय गौतम का कहना था कि प्रदेश सरकार ने 21 जुलाई 2011 को शासनादेश जारी किया था। इसके तहत वे सभी पुलिसकर्मी जिन्होंने 16 वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उन्हें उनके प्रशिक्षण अवधि की सेवा को जोड़ते हुए द्वितीय प्रोन्नति वेतनमान दिया जाना चाहिए।याचिका में कहा गया था कि लाल बाबू शुक्ला केस में हाईकोर्ट ने कहा था कि याची सिपाहियों की प्रशिक्षण अवधि की सेवा को जोड़ना चाहिए। कहा यह भी गया था कि अपर पुलिस महानिदेशक, मुख्यालय ने 17 मार्च 2012 को शासनादेश दिया था। इसमें कहा गया कि पुलिस के कार्यकारी बल में आरक्षी पद का ग्रेड पे 2000, मुख्य आरक्षी का 2400, दरोगा का ग्रेड-पे 4200 और इंस्पेक्टर का 4600 अनुमन्य है। कहा गया था कि सभी याची 16 साल की सेवा पूरी कर चुके हैं। इसलिए वे दरोगा पद का ग्रेड-पे 4200 रुपए पाने के हकदार हैं।

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