कर्मयोग के पैदल रास्ते से मोक्ष-रूपी पर्वत पर चढ़ता है, वह शीघ्र ही आत्मानन्द के शिखर पर पहुँच जाता है- शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती

( अनुराग शुक्ला ) भिवण्डी मुंबई (अनुराग दर्शन समाचार )। सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार हेतु प्रतिनिधि मण्डल के साथ महाराष्ट्र के प्रवास पर पहुँचे श्री काशी सुमेरु पीठाधीश्वर अनन्त श्री विभूषित पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज ने आज धर्म सभा के चतुर्थ दिवस कल्याण में तुकाराम नामदेव जाधव जी एवम् भिवण्डी में कृष्णा गोपीनाथ म्हात्रे जी द्वारा आयोजित धर्म सभाओं में उपस्थित सनातन धर्मावलम्बियों को अपना आशीर्वचन एवम् मार्गदर्शन प्रदान करते हुए कहा कि ज्ञानयोगियों द्वारा जो परम धाम प्राप्त किया जाता है, कर्मयोगियों द्वारा भी वही प्राप्त किया जाता है | इसीलिए वे दोनों एकरूप ही होते हैं | जिस प्रकार आकाश और अवकाश (खाली स्थान) के भेद का निराकरण नहीं हो सकता, उसी प्रकार योग और सन्यास की एकता के सम्बन्ध में भी समझ लेना चाहिए | जो सन्यास और योग का अभेद या एकता समझता हो, उसी के सम्बन्ध में यह ऐसा समझना चाहिए, कि उसे सच्चा प्रकाश प्राप्त हुआ है, और उसी को आत्मस्वरुप के दर्शन हुए हैं ।
पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य जी भगवान ने कहा कि जो ब्यक्ति कर्मयोग के पैदल वाले रास्ते से मोक्ष-रूपी पर्वत पर चढ़ता है, वह शीघ्र ही आत्मानन्द के शिखर पर पहुँच जाता है । धर्म मंच पर धर्म पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी नारायणानन्द तीर्थ जी महाराज, स्वामी अरुणानन्द जी महाराज,कमलेश शास्त्री जी, स्वामी अखण्डानन्द तीर्थ जी महाराज, स्वामी केदारानन्द तीर्थ जी महाराज, स्वामी बृजभूषणानन्द जी महाराज सहित अन्य सन्त एवम् विद्वत्जन विराजमान थे |

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