
गंगा-जमुनी तहजीब से सराबोर केन्द्र का प्रतिष्ठापरक आयोजन राष्ट्रीय शिल्प मेला- राज्यपाल आनंदीबेन पटेल
( अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। आज विविधता में एंकता, ये है हमारी सांस्कृतिक एकरूपता की विशेषता, इसी को सार्थक करता हुआ गंगा-जमुनी तहजीब से सराबोर केन्द्र का प्रतिष्ठापरक आयोजन राष्ट्रीय शिल्प मेला। समारोह की समापन संध्या पर उत्तर प्रदेश, की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल, अध्यक्ष, उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा ऑनलाइन जुड़कर कार्यक्रम का आनंद लेते हुए अपने आर्शीवचनों से केन्द्र को तथा सभी कलाकारों के साथ मेले में आये शिल्पकारों का उत्साहवर्द्धन किया तथा आयोजन की सफलता की सराहना करते हुए केन्द्र निदेशक, प्रो० सुरेश शर्मा को बधाई दी। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश शासन के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, निवेश व निर्यात, खादी एवं ग्रामोद्योग, रेशम, हथकरघा, वस्त्रोद्योग के मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह भी उपस्थित रहे, जिनका केन्द्र निदेशक द्वारा पुष्पगुच्छ व अंगवस्त्र भेंटकर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।कार्यक्रम के प्रथम पायदान पर झारखण्ड की माटी की महक को ढोल की मनमोहक थाप पर कलाकारों ने खसवा छऊ की प्रस्तुति के अन्तर्गत द्वापर युग में योगेश्वर कृष्ण के बाल लीलाओं को बड़े ही सुन्दर ढंग से प्रस्तुत किया, वहीं अरूणांचल प्रदेश के कलाकारों ने आंचलिक भाषा में अपने गीतों को गाकर जू-जू, जा-जा नृत्य के माध्यम से दर्शकों को भाव विभोर किया। प्रयागराज के दोआबा क्षेत्र का प्रसिद्ध ढेंडिया नृत्य की प्रस्तुति को देख दर्शकों में उत्साह का संचार हुआ व तेलंगाना से आये कलाकारों ने लम्बाड़ी की प्रस्तुति के माध्यम से जनजातीय नृत्यों की खूबी को दर्शाया, वहीं ढोल की थाप पर उड़ीसा के कलाकारों चुटकी-चुरा सम्बलपुरी नृत्य प्रस्तुत किया। उत्तर प्रदेश के बुन्देलखण्ड अंंचल के ग्रामीण क्षेत्र में कार्तिक के मास में किया जाना वाला दीवारी नृत्य व भादों के मास में किया जाने वाले पाई-डण्डा नृत्य की प्रस्तुति को राम चरन यादव व उनके दल ने प्रस्तुत किया। गायन की श्रृंखला में प्रथम प्रस्तुति स्थानीय कलाकार अशोक कुमार द्वारा बडे़ ही मनोहारी अंदाज में अनेक लोकगीतों की प्रस्तुतियों से किया गया तत्पश्चात प्रयागराज की सुपरिचित लोकगायिका रंजना त्रिपाठी के गीत ‘‘कहवाँ के पीअर माटी, कहवाँ के कुदार हो’’ ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरी, ‘‘निमिया के डार, मइया झूले रे झुलनवा’’ ने दर्शकों को भक्ति रस की धारा से सराबोर कर दिया। उसके पश्चात संस्कार गीतों की लड़ी में कई गीतों की प्रस्तुतियों से रंजना त्रिपाठी ने समापन समारोह की शाम को और भी यादगार बना दिया। कार्यक्रम के अंत में प्रभारी कार्यक्रम शील द्विवेदी के निर्देशन में तैयार विशेष नृत्य संरचना के प्रदर्शन को दर्शकों खूब सराहा गया और अपने मोबाइल कैमरे में इस क्षण एवं प्रस्तुति को यादगार के रूप में कैद भी किया गया।कार्यक्रम के अन्त में केन्द्र निदेशक ने सभी उपस्थित दर्शकों एवं श्रोताओं के साथ मुख्य अतिथि का भी धन्यवाद ज्ञापित किया।