इलाहाबाद। आज गुरुग्राम के सेक्टर 10 a स्थित श्रीकृष्ण मंदिर में हिन्दू स्वाभिमान (जगदम्बा महाकाली डासना वाली का परिवार) के तत्वाधान में हो रही धर्म संसद के दूसरे दिन भारत के कोने कोने से आये संतो ने वर्तमान में धर्म की स्थिति को लेकर गम्भीर मंथन किया।
रोज मरते सैनिक राजनैतिक कायरता की पराकाष्ठा का परिणाम-जगद्गुरु
धर्म संसद का शुभारंभ जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज,आनन्दपीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी जी महाराज, नामधारी सिक्ख संप्रदाय के सद्गुरु ठाकुर दिलीप सिंह जी महाराज,जूना अखाड़ा में अंतर्राष्ट्रीय मंत्री दुधेश्वरनाथपिठाधीश्वर स्वामी नारायण गिरी जी महाराज ने सभी संतो और धर्म संसद के मुख्य संयोजक विक्रम यादव व अखिल भारतीय ब्रह्मऋषि महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील त्यागी जी के साथ दीप प्रज्वलित करके की।
उसके बाद सभी संतो ने अपने रक्त से भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर उनसे पाँच सूत्रीय मांग की। रक्त से यह पत्र अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रीय संयोजक यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी ने लिखा।इस पत्र में चीन जैसे कठोर जनसँख्या नियंत्रण कानून की मांग,पाकिस्तान का मोस्ट फेवरेट नेशन का दर्जा समाप्त करके आतंकवादी और शत्रु देश घोषित करने की माँग, रामजन्म भूमि पर अविलम्ब अध्यादेश की माँग,समान नागरिक संहिता लागू करने की माँग और धारा 370 खत्म करने की मांग की गयी।
आज की धर्म संसद की अध्यक्षता
जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज और संचालन प्राचीन देवी मंदिर डासना की महंत यति माँ चेतनानंद सरस्वती जी ने किया।
आज धर्म संसद को संबोधित करते हुए अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रीय संयोजक यति नरसिंहानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा की आज हिन्दू समाज की अभूतपूर्व दुर्गति का सबसे बड़ा कारण हिन्दू का अपने धर्म के प्रति अज्ञान है।
हमारा दुर्भाग्य ये है की लगभग एक हजार साल की गुलामी और बंटवारे के बाद भी हिन्दुओ को जो देश मिला उसका संविधान मूल रूप से हिन्दू विरोधी है।हमारे देश धर्मनिरपेक्षता के नाम पर धर्म और संस्कृति की जो घोर उपेक्षा हुई उसका परिणाम आज हमारे सामने है।आज हम हर तरह से अपने धर्म से दूर होकर केवल पाखण्ड और प्रपंच को ही धर्म मान बैठे हैं।इसी कारण आज हमारे बच्चे धर्म से बहुत दूर होते जा रहे हैं और धर्म व अध्यात्म से उनकी दुरी उन्हें अकेलेपन,अवसाद और निराशा के गर्त में धकेल रही है।ऐसे बच्चे न तो देश और न ही धर्म के महत्व को समझ पा रहे हैं।
उन्होंने कहा की यदि आज हिन्दू को अपना अस्तित्व बचाना है तो हिन्दू को अपने धर्म के मूल की तरफ आना पड़ेगा और धर्म का मूल श्रीराम,श्रीकृष्ण और परशुराम हैं।अब इनके नाम जप की नहीँ बल्कि इनके जैसा बनने की जरूरत है और इसका एकमात्र रास्ता श्रीकृष्ण जी के द्वारा प्रदत्त ग्रन्थ श्रीमद्भगवद गीता के मार्ग से होकर जायेगा।यदि हिन्दू ने मानव जीवन में गीता के तीन मुख्य सूत्र योग,यज्ञ और युद्ध को नही अपनाया तो बहुत जल्दी सम्पूर्ण हिन्दू समाज का विनाश हो जायेगा।
आज की धर्म संसद की अध्यक्षता कर रहे जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज ने धर्म संसद का मार्गदर्शन करते हुए कहा की आज जिस तरह से रोज हमारे सैनिकों की लाशें घर आ रही हैं ये राजनैतिक तंत्र की कायरता और विफलता का परिणाम है।आज सैनिकों का मनोबल गर्त में जा चूका है और सैनिकों से लड़ने वाले आतंकवादियों व उनके बौद्धिक समर्थको का मनोबल आकाश तक जा पहुँचा है।पूरी दुनिया में केवल भारत का फौजी है जिसको पत्थर मारा जा सकता है या थप्पड़ मारा जा सकता है वरना किसी भी स्वाभिमानी देश का फौजी अपने देश के लिये बलिदान तो हो सकता है पर अपमानित नही हो सकता।जो कौम अपने सैनिक के सम्मान की रक्षा नही कर सकती उसकी रक्षा तो स्वयं भगवान भी नही कर सकते।आज के नेताओ को इस विषय पर गम्भीर आत्मचिंतन की जरूरत है जो केवल वोटबैंक की राजनीति के कारण हमारे सैनिकों की दुर्गति करवा रहे हैं।अगर हमारे सैनिकों का मबोबल टूट गया तो क्या ये नेता हथियार उठाकर दुश्मन से लड़ने जाएंगे या अपने परिवार को लेकर भारत को छोड़कर भाग जाएंगे।
धर्म संसद को संबोधित करते हुए महामंडलेश्वर स्वामी सर्वानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा की धर्म की रक्षा के लिये धर्म संसद एक बहुत महत्वपूर्ण आयोजन है जिसके लिए सभी हिन्दुओ को जगदम्बा महाकाली डासना वाली के परिवार को धन्यवाद और साधुवाद देना चाहिये।अब धर्म संसद को और अधिक विस्तार देने की जरूरत है।ये जिम्मेदारी अकेले डासना मंदिर की नहीँ है बल्कि इसमें सभी को सहयोग करना चाहिये वरना इतिहास हमे कभी क्षमा नही करेगा।आज भी यदि सन्त समाज धर्म की रक्षा के लिये नही खड़ा हुआ तो इतिहास सदैव संत समाज को धर्म के विनाश का दोषी मानेगा।
धर्म संसद में नामधारी संप्रदाय के सद्गुरु ठाकुर दिलीप सिंह जी महाराज,आनंदपीठाधीश्वर आचार्य महामण्डलेश्वर स्वामी बालकानंद गिरी जी महाराज,महामंडलेश्वर स्वामी प्रज्ञानंद गिरी जी महाराज,महामंडलेश्वर स्वामी सर्वानन्द सरस्वती जी महाराज,महामंडलेश्वर स्वामी हरिओम गिरी जी महाराज,महामंडलेश्वर स्वामी नवलकिशोर दास जी महाराज,श्री श्री भगवान जी महाराज,श्रीमहंत स्वामी भोला गिरी जी महाराज,स्वामी रामा पूरी जी महाराज,स्वामी अगस्त गिरी जी महाराज,यति कृष्णानंद सरस्वती जी महाराज,स्वामी अधेश्वरानंद जी महाराज तथा अन्य वरिष्ठ संतो ने अपना मार्गदर्शन दिया।धर्म संसद के आयोजन में राष्ट्र के लिये लड़ने वाली संस्था साइबर सिपाही की विशेष भूमिका रही।