आराधना महोत्सव- समस्त पंथ विचारधारा एवं धर्माचार्यों को सशक्त अखंड भारत निर्माण हेतु एकजुट होना चाहिए – शंकराचार्य वासुदेवानंद

प्रयागराज (अनुराग दर्शन प्रयागराज ) ।श्रीमज्योतिष पीठाधीश्वर जगदगुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती महाराज ने भगवान आदि शंकराचार्य मंदिर अलोपीबाग में आराधना महोत्सव के अंतिम दिन सभी पंथ विचारधारा एवं धर्माचार्यों का आवाहन करते हुए कहा कि सशक्त अखंड भारत के निर्माण हेतु एकजुट हो जाना चाहिए। स्वामी जी ने कहा कि जन्मभूमि धरती माता स्वर्ग से भी अधिक श्रेष्ठ है। सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया अर्थात सभी सुखी निरोगी हों वसुधैव कुटुंबकम संपूर्ण वसुधा (पृथ्वी के प्राणी) एक परिवार हैं। सबका सम्मान हित है इसलिए सबको मिल जुल कर कार्य प्रयास करना चाहिए।आराधना महोत्सव में विगत 9 दिनों से श्रीमद्भागवत महापुराण कथा सुना रहे पूज्य व्यास स्वामी श्रवणनंद जी ने समरासुर भौमासुर वध की कथा भगवान कृष्ण द्वारा 16108 पटवारियों के लिए अलग-अलग सुंदर भवन निर्माण एवं देवी पुराण गर्ग संहिता आदि के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रकरणों का वर्णन किया।श्रीमद्जोतिषपीठाधीश्वर के पूर्व शंकराचार्य ब्रह्मलीन गुरुओं की स्मृति में आयोजित आराधना महोत्सव में विद्वानों का अभिनंदन व समाजसेवियों का सम्मान पूज्य जगद्गुरु शंकराचार्य ज्योतिषपीठाधीश्वर स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी ने किया तथा विद्वत व सम्मान अभिनंदन पत्र व सम्मान पत्र भेंट किया। डॉक्टर शिवार्चन प्रसाद उपाध्याय पूर्व प्रधानाचार्य श्रीज्योतिषपीठ संस्कृत महाविद्यालय एवं आचार्य पंडित राज नारायण त्रिपाठी (पूर्व) साहित्य विभाग अध्यक्ष श्रीज्योतिषपीठ संस्कृत महाविद्यालय का अभिनंदन एवं प्रोफेसर राजाराम यादव पूर्व कुलपति वीर बहादुर सिंह विश्वविद्यालय जौनपुर डॉक्टर सत्य प्रकाश सिंह प्रधानाचार्य मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज प्रयागराज, पंडित फूल चंद दुबे संस्थापक अध्यक्ष त्रिवेणी संस्कृत महाविद्यालय प्रबंध समिति डॉक्टर रामनरेश त्रिपाठी हिंदी पिंडिवासा एवं पंडित जनार्दन मिश्रा पूर्व अपर महानिरीक्षक उत्तर प्रदेश को सम्मान पत्र भेंट किया गया। सम्मान कार्यक्रम के अध्यक्ष पंडित गिरीश चंद त्रिपाठी अध्यक्ष उच्च शिक्षा परिषद एवं पूर्व कुलपति काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने कहा कि ऋषि-मनिष्यों ने जीवन को प्रयोगशाला मानकर सामाजिक राजनैतिक वैज्ञानिक जीवन की संरचना की है जिस में इन दिनों काफी ह्रास हो गया। जगतगुरु बनने वा समृद्ध व्यवस्था प्राप्त करने के लिए ऋषि-मुनियों के बताए मार्ग पर चलना पड़ेगा।
चोटी प्रतियोगिता में दिनकर ने प्रथम आकाश शर्मा ने द्वितीय एवं विनय कुमार ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। 10 छात्रों को पुरस्कार मिला। पूर्व चोटी सम्राट पंडित विपिन मिश्र का रिकॉर्ड कोई नहीं तोड़ सका। आराधना महोत्सव के अंतिम दिन सर्व प्रथम श्रीमज्योतिष पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती महाराज ने ज्योतिष पीठाधीश्वर जगतगुरु शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी शांतानंद सरस्वती का खडाओं पूजन एवं आदि शंकराचार्य भगवान, भगवान राधा मोहन पीठोंद्धारक शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती भगवान चंद्र मौलेश्वर बाबा की प्रतिमा का पूजन अर्चन माल्यार्पण किया। इसके पश्चात सैकड़ों दंडी सन्यासियों का सम्मान करके दंडी संन्यासी ब्राह्मणों ब्रह्मचारीयों संतो को सम्मान करके प्रसाद ग्रहण कराया व दक्षिणा दिया।
कार्यक्रम में प्रमुख रुप से दंडी स्वामी विनोदानंद सरस्वती दंडी स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती महामंत्री संत समिति स्वामी अद्वैतानंद पंडित शिवार्चन उपाध्याय ब्रह्मचारी आत्मानंद ब्रह्मचारी विशुद्धानंद ब्रह्मचारी जितेंद्रानंद पंडित मधु चकहा दंडी स्वामी श्यामानंद स्वामी शंकरा नंद सरस्वती प्यारे मोहन आचार्य विपिन आचार्य मनीष सीताराम शर्मा राजेश, प्रदीप पांडे एवं ओंकार नाथ त्रिपाठी ,विशाल साहनी, रोहित कनौजिया शिवार्चन प्रकाश पाण्डेय अधिवक्ता दिलीप सिंह आदि प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

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