सैंड आर्ट के जरिए गंगा को बचाने की अनोखी पहल

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। इलाहाबाद विश्वविद्यालय दृश्य कला विभाग के छात्रों द्वारा बनाया गया एक अनोखा और भव्य सैंड आर्ट। सैंड आर्ट बनाने वाले कलाकार , अजय कुमार गुप्ता मनोज कुमार, बादल, अंकित यादव, अंजली यादव, सृष्टि कुशवाहा जी है।

सैंड आर्टिस्ट ने जो कलाकृति बनाई जिसमे ये दिखाया है कि किस तरह एक मछली गंगा किनारे आने वाले लोगों द्वारा फेंके गए प्लास्टिक की बोतल को खाकर बीमार पड़ गई है और वह धीरे-धीरे मर रही है. इसी तरह कछुआ भी तड़प रहा है जबकि गंगा मां बेबस और लाचार होकर अपने जलीय जीव जंतुओं को मरते हुए देख रही है. सैंड आर्टिस्ट अजय गुप्ता (पठनायक) का कहना है की ‘गंगा’ शब्द सुनते ही पवित्रता की अनुभूति होती है क्या ये गंगा अब उतनी ही पवित्र है, जितनी की पूर्व में थी? हम भारतीयों के लिये गंगा सिर्फ एक नदी नहीं है, ये हमारी सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़ी है, हमेशा से सुनते आये हैं कि गंगा मेें डुबकी लगाने से सारे पाप धुल जाते हैं।

लेकिन हमने अपने पापों के अलावा सब कुछ (मैल, गन्दगी) इस गंगा में प्रवाहित करना प्रारम्भ कर दिया ऐसा करते-करते आज गंगा इतनी मैली हो गई है कि इसका गंगा होने का अस्तित्व ही समाप्त होता जा रहा है।

आज गंगा सिर्फ कूड़ा-कचरा बहाकर ले जाने वाली नाला बन के रह गई है जो हमारे पापों को धुलने की क्षमता रखती थी, आज वो हमारे कारण खुद ही मैली हो गई है जिस गंगा पर हमें गर्व होता था, आज उसी गंगा को हमारी वजह से लज्जित होना पड़ रहा है।

चूँकि गंगा का ये हाल हमारी वजह से हुआ इसलिये हमें स्वयं गंगा के शुद्धिकरण के विषय में तुरन्त महत्त्वपूर्ण कदम उठाने चाहिए। ये बहुत ही चिन्ताजनक विषय है। इसलिये इसको प्राथमिकता देना चाहिए।

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