कई वर्षों के बाद जमीन बंटवारे का काम दंडी संन्यासी परिषद न करके मेला प्रशासन के द्वारा किया जा रहा

कई वर्षों के बाद जमीन बंटवारे का काम दंडी संन्यासी परिषद न करके मेला प्रशासन के द्वारा किया जा रहा ह

दंडी सन्यासी परिषद के संतों के बीच जमीन बंटवारे को लेकर विवाद होने के बाद दंडी समाज दो धड़ों में बंट गया

(अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। संगम की धरती पर हर साल लगने वाले माघ मेले के लिए जमीन आवंटन का कार्य बुधवार से शुरू हो गया है। सबसे पहले परंपरा के मुताबिक दंडी बाड़ा यानि दंडी संन्यासियों को जमीन आवंटित की जा रही है। मेला प्रशासन से जुड़े अधिकारी और कर्मचारी सेक्टर 5 में दंड़ी बाड़ा के लिए जमीन आवंटित कर रहे हैं। अगले दो दिनों तक दंडी संन्यासियों को ही जमीन आवंटित की जाएगी। इसके बाद खाक चौक और आचार्य बाड़ा की जमीन आवंटित होगी। जिसके बाद तीर्थ पुरोहितों और अन्य संस्थाओं को जमीन आवंटित की जाएगी।

भूमि पूजन के साथ की प्रार्थना

परंपरा के मुताबिक जमीन आवंटन से पूर्व दंडी संन्यासियों ने मेला क्षेत्र में भूमि पूजन किया. इस मौके पर दंडी संन्यासियों ने मां गंगा और यमुना से माघ मेले के सकुशल और निर्विघ्न संपन्न होने की कामना की। दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक स्वामी महेशाश्रम महाराज और राष्ट्रीय अध्यक्षस्वामी ब्रह्माश्रम महाराज ने दंडी संन्यासियों और संस्कृत विद्यालय के विद्यार्थियों के साथ पूजा अर्चना और मंगल आरती की. इस मौके पर पंडित संन्यासियों ने मेले की व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी जताई. दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक स्वामी महेशाश्रम महाराज ने कहा है कि माघ मेले में अभी सड़क, बिजली और पानी की व्यवस्था बहाल नहीं हो पाई है. ऐसे में 14 जनवरी मकर संक्रांति से शुरू हो रहे माघ मेले तक सभी तैयारियां पूरी होने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है‌।

प्रशासन को चेतावनी

वहीं, दंडी संन्यासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज ने कहा है कि प्रशासन साधु संतों से किए वायदे के मुताबिक तय समय में अपना कार्य पूरा करें। उन्होंने कहा कि अगर मेला शुरू होने से पहले तैयारियां पूरी नहीं होती हैं तो मेले में भारी अव्यवस्था फैल सकती है. वहीं दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक स्वामी महेशाश्रम महाराज ने शासन और प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर मेले में अव्यवस्था हुई तो साधु संत भी अपना विरोध दर्ज कराएंगे।गौरतलब है कि दंडी सन्यासी परिषद के संतों के बीच जमीन बंटवारे को लेकर विवाद होने के बाद दंडी समाज दो धड़ों में बंट गया है और कई वर्षों के बाद जमीन बंटवारे का काम दंडी संन्यासी परिषद न करके मेला प्रशासन के द्वारा किया जा रहा है।

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