श्रीमद्भागवत कथा श्रवण मात्र से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होते है प्राणी के -पं. अभिषेक कृष्णम्

कृष्ण विवाह और कृष्ण-सुदामा मित्रता की झाकियों मे मंत्रमुग्ध हुए भक्तगण

बरसात मे भी अन्तिम दिन कथा रसपान को उमडी़ भक्तो की भीड़

( अनुराग शुक्ला )
नारीबारी,प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) । क्षेत्र के नारीबारी बाजार के श्री सर्वेश्वर हनुमान मंदिर पर आयोजित श्रीमद्भागवत भागवत कथा एवं गोपाल महायज्ञ का रविवार को समापन हो गया। श्रीमद्भागवत भागवत कथा के छठवें दिन देर-रात श्रीकृष्ण- रुक्मणी के विवाह का प्रसंग व अन्तिम सातवें दिन कृष्ण- सुदामा के मिलन परिक्षित मोक्ष की कथा हुई। कथा की पूर्णाहुति और भण्डारे का आयोजन सोमवार को किया गया है। कथावाचक आचार्य पंडित अभिषेक कृष्णम् हरिकिंकर जी महाराज ने कृष्ण रुक्मणी विवाह के प्रसंग को सुनाते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण के साथ हमेशा देवी राधा का नाम आता है। भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी लीलाओं में यह दिखाया भी था कि श्री राधा वह दो नहीं बल्कि एक है। लेकिन देवी राधा के साथ श्रीकृष्ण का अलौकिक विवाह नहीं हो पाया। देवी रुक्मणी और श्रीकृष्ण के बीच प्रेम कैसे हुआ इसकी बड़ी अनोखी कहानी है। इस कहानी से प्रेम की नई परंपरा की शुरुआत भी हुई। जब विवाह की उम्र हुई तो श्रीकृष्ण के लिए कई रिश्ते आए लेकिन उन्होंने सभी को मना कर दिया। उनके विवाह को लेकर माता पिता और भाई चिंतित थे बाद में रुक्मणी का श्री कृष्ण से विवाह हुआ। कथा के दौरान अभिषेक कृष्णम् हरिकिंकर महाराज ने कहाकि श्रीमद्भागवत कथा श्रवण से जन्म जन्मांतर के विकार नष्ट होकर प्राणी मात्र का अलौकिक व आध्यात्मिक विकास होता है। भागवत कथा से मन का शुद्धिकरण होता है। के मित्रता की अनन्य प्रेम का वर्णन करते हुए कहा कि “सांवली सूरत पे मोहन दिल दीवाना हो गया” दो बिछड़े हुए मित्रों के मिलन की झांकी देख लोग भावुक हो गए। अंतिम कथा परिक्षित मोक्ष की हुई समापन यज्ञ मे आचार्य नुकुल पांडेय,सुधाकर मिश्र,शिवशंकर पाण्डेय, वृजवासी संगीतकार कलाकारो में हेमंत वृजविहारी,पवन वृजवासी,रवि वृजवासी,नटवर जी आदि ने विशेष प्रस्तुति दी। कार्यक्रम मे प्रमुख सहयोगी के रूप मे राम कैलास शुक्ल,शरद कुमार गुप्ता,महेन्द्र शुक्ला, वैजनाथ केसरवानी,सूर्य भान सिंह, दिलीप कुमार चतुर्वेदी,अशोक मिश्र, सूर्यकांत शुक्ल,अखिलेश वर्मा, दिवाकर साहू,ऋषि मोदनवाल, मुन्ना द्विवेदी,संतोष यादव,रमेश सोनी,केदार चौरसिया, आर.वी.सिंह, पप्पू केसरवानी, प्रदीप पाण्डेय,भोला केसरवानी, कृष्ण कली, रामेश्वरी देवी आदि रहे।

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