
(अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। तिलिस्मी दुनिया के बेताज बादशाह सिकंदर इन दिनों प्रयागराज की पावन धरा पर चंद्रलोक सिनेमा के पास स्थित राजर्षी टंडन मंडपम में अपनी जादूगरी के करिश्मो का प्रदर्शन कर जहां दर्शको का भरपूर मनोरंजन कर रहे है,वही सामाजिक कुरीतियों पर भी करारा प्रहार कर खूब तालियां और वाहवाही बटोर रहे हैं। देखा जाए तो बंगाल का तथाकथित काला जादू भले ही मन-मस्तिष्क में कोई संशय पैदा करता हो, लेकिन वास्तव में जादू (मैजिक ) तकनीकी और कला ऐसा सम्मिश्रण है, जो आपके मन-मस्तिष्क को प्रफुल्लित-रोमांचित कर देता है। जादूगर सिकंदर की मानें तो जादू सिर्फ और सिर्फ एक ललित कला है।
इसमें विज्ञान, कला, तकनीकी सहित असंख्य महत्वपूर्ण विधाओं- आयामों का संगम है। छुटभैये जादूगरों की बात छोड़ दें तो नामचीन जादूगर अपने जादुई करिश्मों से कहीं न कहीं कोई संदेश अवश्य देते हैं जिससे दर्शको पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। जादू की इस खास दुनिया में देखें तो पी सी सरकार, जादूगर आनन्द और ओपी शर्मा का नाम सबसे पहले उभर कर सामने आता है,क्योंकि उन्होंने जादू को एक नया आयाम दिया और हिन्दुस्तानी जादू को विदेशों तक ले गये। जादूगर पी. सी. सरकार जादू को गांव-गली-गलियारों से निकाल कर मंच (स्टेज) तक ले आये और उसके बाद नई सदी के मैजिक बुक में एक नया आयाम जादूगर सिकंदर के नाम से जुड़ा। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के के उन्नाव जिला के वासी व पूरे विश्व में सुपर स्टार मैजिशियन के रुप में चर्चित जादूगर सिकंदर ने एक दशक के जादुई सफर में 8 हजार से भी अधिक शो विश्व रंगमंच पर पेश कर चुके हैं। सिकंदर ने अनेको खतरनाक स्टंट किए और देश-विदेश में उन्होंने आम आदमी के दुख-दर्द से लेकर सामाजिक व्यवस्थाओं-कुरीतियों की व्यथा-कथा बयां करने से लेकर उन पर तीखे व्यंग्य बाण भी छोड़े। अपने जादुई पिटारे को लेकर वे मॉरिशस, दुबई, और नेपाल सहित कई देशों में जा चुके हैं। विदेशों में उनके 200 से अधिक शो हो चुके हैं।तिलिस्मी दुनिया बादशाह जादूगर सिकंदर के जादुई पिटारे में कन्या भ्रूण हत्या, अशिक्षा, अंधविश्वास, दहेज उत्पीडन, भ्रष्टाचार, प्रकृति रक्षा, परिवार नियोजन, नशाखोरी, कोविड से बचाव के लिए मास्क पहन कर ही कही आने जाने और वैक्सीन की दोनो डोज समय लेने की अपील आदि को रेखांकित करने वाली सामाजिक कुरीतियों पर विशेष करतब शामिल हैं। जादूगर शो में बताते हैं कि किस प्रकार गर्भ में कन्या भ्रूण हत्या की जा रही है। दहेज उत्पीडन को देखते हुए कोई नहीं चाहता कि उसके घर लडकी जन्मने पाये। अंजाम सामने है, देश में बालक-बालिका के जन्म का अनुपात या संतुलन बिगड़ता जा रहा है। जादूगर का यह संदेश कहीं न कहीं समाज को सोचने पर विवश करता है। जादू के पिटारे से भ्रष्टाचार का राक्षस पर भी करतब निकलता है। जादूगर के शब्दो में राजनीति इस तरह के राक्षस को पालसी-पोसती है लेकिन जब राष्ट्र जागता है तो नकारात्मक शक्तियों का पतन हो जाता है। जादूगर सिकंदर की सलाह है कि जादू को शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए ताकि समाज जागरुक हो। जादूगर के अनुसार जिस प्रकार दादी-नानी की कहानियां बच्चों को सकारात्मक संदेश देती हैं, उसी तरह जादू से बच्चों को संस्कार के साथ ही उन्हें राष्ट्र निर्माण का संदेश मिलता है क्योंकि बच्चे ही देश का भविष्य हैं। उनकी मानें तो जादू कोई करिश्मा नहीं ,बल्कि साइंस एंड टेक्नॉलाजी योगा एवं कला का एक सम्मिश्रण्र है। आरी से युवक-युवती को काट देना, हवा में गायब कर देना आदि आदि सब सांइस एंड टेक्नोलॉजी की उपलब्धियां हैं। आंख से देखने की स्पीड से कहीं अधिक तेज स्पीड में जादूगर को अपना काम करना होता है। हालांकि जादू शो का संचालन एक इंडस्ट्री की तरह खर्चीला है, क्योंकि शो के उपकरण जुटाना आर्थिक संसाधन के बिना आसान नहीं है। सिकंदर कहते हैं कि जादू का शो संचालित करने के लिए एक उद्योग की तरह काम करना होता है। जादू के प्रदर्शन मे परिधानो का भी खास रोल होता है और शो मे कलाकारो के पल पल बदलते परिधान भी खूब मोहित करता है। जादूगर सिकंदर की मानें तो शिक्षाप्रद जादुई चमत्कारों से समाज में सकारात्मक सोच का बदलाव लाया जा सकता है। जादू हंसी-ठहाका, रोमांच, रहस्य, चिंतन-मनन व संदेश आदि सभी कुछ देता है। जहांगीर नामा में इंडियन रोप ट्रिक का उल्लेख मिलता है। जिसमें जादूगर रस्सी पर चढ़ कर गायब हो जाता है लेकिन आज सांइस एंड टेक्नालाजी इससे कहीं आगे निकल चुकी है। साइंस एंड टेक्नालाजी का उपयोग और जादू में संदेशपरक कार्यक्रम होने से समाज में कुछ-न-कुछ कहीं न कहीं बदलाव अवश्य आएगा। फिलहाल जादूगर सिकंदर का जागरुकता अभियान लगातार जारी है जिसे प्रयागराज के लोगो द्वारा खूब सराहा जा रहा है। जादूगर अपने शो में मास्क अनिवार्य रूप से पहनने ,हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग करने और कोविड वैक्सिनेशन के लिए भी जादुई तरीके से प्रेरित कर रहे हैं।