बैंक यह कहकर नहीं बच सकते कि उनकी जिम्मेदारी नहीं हैं-हाईकोर्ट

 

पुलिस यह कहकर नहीं बच सकती कि साइबर अपराधी उनकी पहुंच से दूर-हाईकोर्ट

साइबर अपराध की जवाबदेही तय होनी चाहिए- हाईकोर्ट

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )।इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्व न्यायमूर्ति पूनम श्रीवास्तव के बैंक खाते से झारखंड के साइबर अपराधियों द्वारा पांच लाख रुपए की ठगी के सभी आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। कहा है कि साइबर ठगी के मामले में पैसे की सुरक्षा की जिम्मेदारी बैंक की होनी चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर कुमार यादव ने नीरज मंडल उर्फ राकेश, तपन मंडल, शूबो शाह उर्फ शुभाजीत व तौसीफ जमा की जमानत अर्जी को खारिज करते हुए दिया है।हाई कोर्ट ने कहा कि बैंक में पैसा जमा करने वाले लोग देश के प्रति ज्यादा ईमानदार हैं। उनका पैसा हर हाल में सुरक्षित रहना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि गरीब ईमानदार आदमी अपना पैसा बैंक में रखता है। इससे देश की आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। कालाबाजारी करने वाले सफेदपोश लोग पैसा तहखाने में रखते हैं, जो देश के विकास में काम नहीं आता। वे विकास में रोड़ा उत्पन्न करते हैं। कोर्ट ने कहा कि बैंक यह कहकर नहीं बच सकते कि उनकी जिम्मेदारी नहीं हैं। पुलिस यह कहकर नहीं बच सकती कि साइबर अपराधी उनकी पहुंच से दूर नक्सली क्षेत्रों में रहते हैं। साइबर अपराध की जवाबदेही तय होनी चाहिए।

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