
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। स्वामी विवेकानंद एक क्रांतिकारी एवं आध्यात्मिक युवा थे वह एक साधारण गरीब कायस्थ परिवार में जन्म लेने के बाद गरीबी से सतत संघर्ष करते हुए भी उन्होंने अपने गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस जी पर अनन्य भक्ति सेवा एवं उनकी इच्छाओं की प्रतिमूर्ति में स्वयं को समर्पित कर दिया। यह बातें आज नैनी के पीडीए कालोनी के एक निजी गेस्ट हाउस में डॉ राज विहारी जी सह प्रान्त कार्यवाह ने युवा गोष्ठी में कही।उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद 25 वर्ष की आयु में सन्यास धर्म गेरुआ वस्त्र धारण कर लिया। उन्होंने स्वामी विवेकानंद जी पर प्रकाश डालते कहा की स्वामी जी एक क्रांतिकारी एवं आध्यात्मिक युवा थे। वह अपने गुरु जी के आदेश से ही वह 1893 में शिकागो में आयोजित धर्म संसद में हिंदू धर्म के प्रतिनिधि बनकर जो कुछ बोला उसने एक अमर इतिहास की रचना कर दी थी। कार्यक्रम में अशोक जी सह संघचालक विश्वकर्मा नगर ने विवेकानंद की जयंती पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंद समाज एवं भारत उनके द्वारा किए गए अपूर्व कृतियों और योगदानो को सदा ही स्मरण किया करेगा।दीपक जी नैनी भाग बाल्य प्रमुख ने भी स्वामी विवेकानंद पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम का संचालन मानवेंद्र प्रताप ने किया।
अध्यक्षता डॉ विमलेश तिवारी ने की, उक्त अवसर पर प्रभात, वेद प्रकाश, उमाशंकर गुप्ता, अवधेश, अशोक मिश्रा, सुकृत, रजनीकांत आकाश, राजेश और कृष्णा सहित दर्जनों संघ कार्यकर्ता उपस्थित रहे।