भारतीय संस्कृति का दिव्य महापर्व है मकर संक्रांति: श्रीमहंत रविन्द्रपुरी

( अनुराग शुक्ला )हरिद्वार ( अनुराग दर्शन समाचार ) । अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मां मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत रविन्द्रपुरी महाराज ने कहा कि मकर संक्रांति सनातन भारतीय संस्कृति का दिव्य एवं रहस्यमय महापर्व है। इस दिन सूर्यदेव काल चक्र की मकर राशि में प्रवेश कर जाते हैं। इस दिन तिल, खिचड़ी, गर्म वस्त्रों का दान अधिक पुण्यकारी होता है।
श्रीमहंत रविंद्रपुरी महाराज ने श्रद्धालु भक्तों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मकर संक्रांति स्नान पर्व पर गंगा स्नान को बहुत उत्तम माना गया है। यह पापों का प्रायश्चित करने का दिन है। इस दिन तिल के लड्डू बनाए जाते हैं। काले ओर सफेद तिल के लड्डू और तिल गंगा में अर्पित कर स्नान किया जाता है। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति को अपना दिव्य कमंडल भरकर और उसे जनमानस में बांटकर अकाल ग्रस्त लोगों की भूख मिटाकर महत्वपूर्ण बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति वर्ष का पहला स्नान पर्व है। इस दिन सूर्य भगवान मकर राशि में प्रवेश करता है। इस दिन गंगा में आस्था की डुबकी लगाने के बाद सफेद, काले तिल का दान करने से मनोकामना पूर्ण होती है और पापों से मुक्ति मिलती है। उन्होंने कहा कि कोरोना की गाइडलाइन का पालन करते हुए ही मकर संक्रांति स्नान पर्व मनाया गया। उन्होंने सभी से अपील करते हुए कहा कि शारीरिक दूरी सहित सरकार की गाइडलाइन का पालन अवश्य करना चाहिए। श्रीमहंत रविन्द्रपुरी महाराज ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना महामारी खत्म करने का जो मंत्र दिया है। सभी देशवासियों को उसका पालन करना चाहिए। तभी देश सुरक्षित रह सकता है।

(हरिद्वार) खिचड़ी खाना या खिचड़ी दान करना बहुत पुण्यदायी : स्वामी आलोक गिरी
मकर संक्रांति पर किया खिचड़ी प्रसाद का वितरण
हरिद्वार 14 जनवरी (आरएनएस)। मकर सक्रांति के पर्व पर जगजीतपुर पीठ बाजार पुलिया के पास स्थित श्री बालाजी शनिदेव मंदिर में पूजा पाठ कर जनता को खिचड़ी प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर स्वामी आलोक गिरी ने लोगो को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मकर संक्रान्ति पर्व को कहीं कहीं उत्तरायण भी कहते हैं। 14 जनवरी के बाद से सूर्य उत्तर दिशा की ओर अग्रसर होता है। जिसके कारण उतरायण भी कहा जाता है। पूरे भारत में इस पर्व को धूम धाम से मनाया जाता है। इस दिन खिचड़ी खाना या खिचड़ी को दान करना बहुत पुण्यदायी माना जाता है। उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण कार्यक्रम को सूक्ष्म रुप में किया गया है। लोगों को कोरोना से बचना चाहिए। मंदिर का संचालन कर रहे अनिल मिश्रा ने कहा कि मंदिर में धार्मिक गतिविधियां समय-समय पर आयोजित की जाती हैं। जिसमें सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहते हैं। प्रत्येक वर्ष की तरह इस वर्ष भी मकर संक्रांति पर्व मनाया जा रहा है। पूर्व में विशाल भंडारा आयोजित किया जाता था। लेकिन इस बार कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए लोगों को खिचड़ी का प्रसाद वितरित किया जा रहा है। इस अवसर पर पार्षद विकास कुमार, पार्षद मनोज परालिया, कमल प्रधान, नीरज वालिया, पंकज जोशी, विद्या शंकर सोनकर, कृष्ण लाल प्रजापति, राजेश धीमान वालिया, पंकज मिश्रा, संदीप प्रधान, ललित मोहन जोशी, शशि मिश्रा, धर्मेंद्र मिश्रा, रमेश मिश्रा, अशोक मिश्रा आदि उपस्थित थे।

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