
लगातार आस्था का रेला लगा रहा कहीं भी कोविड-19 का पालन नहीं किया
( अनुराग शुक्ला )
गौरतलब है कि मकर संक्रांति से पंचक, खरमास और अशुभ समय समाप्त हो जाता है और विवाह, ग्रह प्रवेश आदि के शुभ कार्य शुरू हो जाएंगे। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार शुक्रवार की रात 8ः37 से मकर संक्रान्ति शुरू हो गया, जिससे शनिवार को श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी हुई है। सुहाने मौसम में मकर संक्रांति के पुण्यकाल में स्नान करने हेतु घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ शुक्रवार से ही जुटने लगी थी। हर-हर गंगे के उद्घोष के साथ स्नानार्थी गंगा में पूण्य की डुबकी लगा रहे हैं। स्नान बाद घाट पर ही पूजा-पाठ कर वे तिल व खिचड़ी का दान कर पुण्य का लाभ ले रहे हैं।