संतों की जमीन संस्थाओं को बांटकर क्वारंटीन हुए अफसर

दफ्तरों का चक्कर काट रहे संतों में है नाराजगी

( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। संगम की पवित्र भूमि पर बस से मेले में कल्पवास तो शुरू हो गया है लेकिन संतो और कल्पवासियों की समस्याएं खत्म नहीं हो रही हैं। माघ माह शुरू हो जाने के बाद भी मेले के बसने का कार्य पूरा नहीं हुआ है। संतों और कल्प वासियों को जरूरी सुविधाएं भी अब तक पूरी तरह नहीं दी जा सकी हैं। इससे संतों में नाराजगी है। उनका आरोप है कि मेला प्रशासन ने उनकी सुविधाओं को काटकर निजी संस्थाओं को दे दिया है। अब संत परेशान है तो मेला प्रशासन से जुड़े अधिकारी- कर्मचारी कोरोना के बहाने खुद को क्वारंटीन कर ले रहे हैं। मेला अभी तक पूरी तरह से बस नहीं पाया है। जो परिस्थितियां दिख रही हैं उनसे तो ऐसा लग रहा है कि सब कुछ ठीक होने तक अमावस्या का स्नान आ जाएगा और फिर मेला खुद ब खुद अपने समापन की ओर बढ़ने लगेगा। कोविड-19 संक्रमण भी मेले पर एक बड़ा संकट बना हुआ है। अखिल भारतीय दंडी सन्यासी परिषद के संरक्षक शंकराचार्य स्वामी महेश आश्रम ने व्यवस्थाओं के बारे में पूछने पर बताया कि उन्हें विगत वर्षों की तुलना में इस बार सुविधाएं कम दी गई हैं। एपी टेंट कम कर दिए गए हैं और वाटर प्रूफ पंडाल भी नहीं दिया गया है जबकि हर वर्ष मिलता रहा है। बिजली, शौचालय आदि के लिए भी काफी भागदौड़ करनी पड़ रही। अब तो स्थिति यह है कि संत-महात्मा एक सरकारी दफ्तर से दूसरे दफ्तर दौड़ रहे हैं, लेकिन उनकी बात सुनने वाला कोई नहीं है। जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारी मिलते ही नहीं, अधिकांश के अस्वस्थ होने की बात बताई जाती है। सब ने खुद को जानबूझकर क्वारन्टीन कर लिया है। शंकराचार्य जी ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई कि मेला प्रशासन में तैनात अधिकारी कर्मचारी निजी संस्थाओं को सुविधाएं देने में ज्यादा रुचि ले रहे हैं । जबकि मेला संतों और कल्पवासियों का है। अधिकांश निजी संस्थाएं पूर्व के प्रशासनिक अधिकारियों और राजनीतिक लोगों की हैं। मेले के जिम्मेदार लोग उन्हें खुश करने के लिए संतो-महात्माओं की सुविधाओं में कटौती करके संस्थाओं को दे रहे हैं।

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