
ऋतुओं में खिला हुआ, फूलों से लदा हुआ उत्सव का क्षण है बसंत
सोनभद्र ( अनुराग दर्शन समाचार ) । मदमस्त बसंती बयार संग हिचकोले खाती सरसों की पीली विरवाइयों के साथ युवाओं का मन मयूर भी कुलांचे भरने लगा है। युवाओं की टोलियां प्रकृति की इस अनुपम तोहफे का आनंद लेने के लिए सोनघाटी के पिकनिक स्पॉटों पर जमा होने लगी है। वनन में, वागन में बगरयो बसंत है। बसंत की आमद ने सोनांचल की हसीन वादियों में चार चांद लगा दिया है। सोनघाटी में अठखेलियां करता बसंत का बचपन यहां की आवोहवा में मदहोसी का रस घोल रहा है। युवाओं का मन बहकने लगा है। धरती पीले- हरे रंगों का कैनवास नजर आ रही है। जिस पर प्रकृति ने एक से एक सच्चे रंग भरकर अद्भुत रचनाएं बनाई है। किशोरवय आह्लादित हैं और युवाओं का मन मयूर झंकृत हो उठा है। किसानों का दिल सरसों की पीली डालिया देखकर मोर के मानिंद नाच रहा है। फूलों का रस लेने के लिए तितलियां उनके इर्द-गिर्द मंडराने लगी है। युवाओं की हंसी से रूमानियत भरी मस्ती का माहौल बनने लगा है। बसंती चमन में युवा का अल्हड़ मन कुछ बहका- बहका सा नजर आने लगा है। लहलहाती खेती देख किसान भी प्रफुल्लित हैं। मन उमंग तरंगीत होने लगा है। वासंती प्रकृति के सौंदर्य से सभी मदमस्ती से झूमने लगे हैं। कुल मिलाकर वसंत ऋतु को ऋतुराज कहा जाता है। इसके आगमन से प्रकृति में नवयौवन का सौंदर्य हिलोरे मारने लगता है। बहुरंगी चांदर ओढ़े धरती सबका मन मोह लेती है। यही नजारा अब शुरू हो गया है। बाग में आम के वृक्षों पर गौर की ताजी कोपलें आने लगी है। जो न सिर्फ सुहावने मौसम का परिचय दे रही है, बल्कि सुखद भविष्य का संकेत भी देने लगी है। गुनगुनी धूप का मजा बसंती झोंकों ने अहसास कराने लगे हैं। कहते हैं कि ऋतुओ में खिला हुआ, फूलों से लदा हुआ उत्सव का क्षण है बसंत। इस ऋतु में कलियों और भौरों की गुफ्तगु इस कदर मदहोश कर देती है कि समूचा निसर्ग गुनगुनाने लगता है। भगवतगीता में श्रीकृष्ण ने भी सर्वश्रेष्ठ बातों की गिनती करते हुए वसंत को शीर्ष स्थान दिया है।
*बसंत पंचमी को पूजी जाती हैं वाग्देवी*
बसंत ऋतु खिलने की सौंदर्य की ऋतु है। प्रकृति में देखें तो यह रंगों और गंधों का उत्सव है। इन दिनों हरियाली कुछ ज्यादा ही हरी होती है, धूप कुछ अधिक ही उजली दिखती है और छोटे-छोटे घास के पौधे भी अपनी खुशी फूल बनकर जाहिर करते हैं। छात्र अभिषेक कुमार कनौजिया, रितेश कुमार कनौजिया,इशाद अली कहते हैं कि वसंत ऋतु के आगमन पर एक ओर जहां बसंत पंचमी के दिन मेले लगते हैं, वहीं दूसरी तरफ ज्ञान की अधिष्ठात्री भगवती सरस्वती की पूजा होती है। विद्या से ही अमृत पान किया जा सकता है। जिसके ऊपर देवी सरस्वती प्रसन्न होती हैं, माता लक्ष्मी भी उस पर खुश होती है।