जहूराबाद की खस्ताहाल सड़कों पर राजभर चलाएंगे साइकिल

 

भाजपा की घेराबंदी के कारण ही शिवपुर से लौटे जहूराबाद

पांच वर्षों तक भाजपा और राजभर के झगड़े में फंसे लोग

जहूराबाद का विकास नहीं होने से लोगों में काफी है गुस्सा

बदहाली के सवाल पर राजभर भाजपा को मानते हैं जिम्मेदार

2017 में भाजपा के सहयोग से ओपी राजभर बने थे विधायक

गाजीपुर ( अनुराग दर्शन समाचार ) । जहूराबाद के विधायक एवं सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर आखिरकार पुनः लौटकर जहूराबाद की सियासी धरती से चुनाव लड़ने का एलान किया है। अचानक जहूराबाद में चुनाव लड़ने के पीछे राजभर की यह रणनीति रही कि यहां के 60 हजार से अधिक राजभर उनकी जीत में निर्णायक हो सकते हैं। यहां भितरघात का खतरा कम होगा और पूरे पूर्वांचल में वह राजभरों के भरोसे जहूराबाद को छोड़ प्रचार करके सपा के पक्ष में माहौल बना सकेंगे। शिवपुर की सीट पर भाजपा की सियासी घेराबंदी में न फंसकर वह अपने बेटे को मैदान में उतारकर यह संदेश देने की कोशिश किया कि अब हमारा पुत्र ही भाजपा को सत्ता से बेदखल करने में सक्षम हैं।
जहूराबाद के सियासी गणित पर नजर दौड़ाई जाए तो यहां पर दलित मतदाता सबसे अधिक हैं। दूसरे नंबर पर राजभर तो तीसरे नंबर पर यादव सहित अन्य जातियां आती हैं। यहां पर हमेशा से राजपूत, ब्राम्हण और भूमिहार वोट निर्णायक रहे हैं। इसके अलावा करीब चालीस हजार के आसपास चैहान वोट किसी का खेल बिगाड़ने में सक्षम हैं। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में सुभासपा अध्यक्ष ने भाजपा के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ा था। उन्हें 86583 और बसपा के कालीचरण राजभर को 64574 वोट मिले थे। फिर भाजपा की सरकार बनीं तो मंत्री भी बने। लेकिन लोकसभा के बाद 2019 में उन्हें मंत्री पद से बर्खास्त कर दिया गया। तब से लेकर अभी तक राजभर भाजपा के खिलाफ आग उगल रहे हैं। देखा जाए तो ओमप्रकाश राजभर 2012 का चुनाव भी इस सीट से कौमी एकता दल के समर्थन से लड़े थे। सपा की सैयदा शादाब फातिमा को 67012, बसपा के कालीचरण राजभर को 56534 और ओमप्रकाश राजभर को 48865 मत मिले थे। वह तीसरे स्थान पर चले गए। सियासी जानकार मानते हैं कि ओमप्रकाश राजभर को जहूराबाद से मैदान में उतारने के पीछे की सियासी चाल पर फाटक की तरफ इशारा करते हैं। फाटक यह जानता है कि अगर राजभर शिवपुर गए होते तो पीएम का संसदीय क्षेत्र होने के कारण भाजपा वहां पर सियासी चक्रव्यूह में फंसा सकती थी। जिससे सपा को कई सीटों पर नुकसान उठाना पड़ सकता था। जहूराबाद से लड़ने में उन्हें यह फायदा मिलेगा कि वह अपनी सीट आसानी से निकाल लेंगे और पूर्वांचल की विभिन्न सीटों पर सपा के पक्ष में माहौल बना सकते हैं। और उन तीन सीटों पर फाटक की भी मदद कर सकेंगे जहां से वे विधायक बनना चाहते हैं। जहूराबाद के विकास की बात करें तो यहां पर बदहाली के सिवाय कुछ नहीं है। ओपी राजभर के चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ हजारों पोस्ट पड़े हुए हैं। सीधे उनको यहां का मतदाता ललकार रहा है। यहां पर रूके विकास पर राजभर सीधे तौर पर इसे भाजपा की साजिश और कमी बताते हैं। वे आरोप लगा चुके हैं कि भाजपा ने जानबूझकर यहां का विकास नहीं किया। क्योंकि उस समय वह भाजपा के घटक दल थे, मगर उनके हाथ में कुछ नहीं था। इस बार के चुनाव में अगर राजभर और उनके सहयोग दल जीते तो 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए सियासी रूप से मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं।

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