
संगम तट पर श्रद्धालुओं का रेला, सुरक्षा के कड़े इंतजाम
मौनी अमावस्या से पूर्व सोमवार से ही संगम में लाखों श्रद्धालुओं ने स्नान किया
संगम में शंकराचार्य नरेंद्रानंद महामंडलेश्वर सतुआ बाबा जगतगुरु डां रामकमलदास वेदान्ती सहित दंडी स्वामियों ने लगाई डुबकी
( अनुराग शुक्ला ) प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। कोरोना संक्रमण के खतरे के बीच सोमवार की सुबह से माघ मेले के सबसे बड़े स्नान पर्व मौनी अमावस्या की शुरुआत हुई। आज मंगलवार को भी मौनी अमावस्या के शुभ मुहूर्त पर प्रयागराज में श्रद्धालु का रेला है। दोपहर तक यहां 50 लाख से अधिक लोगों ने स्नान किया है। स्नान का सिलसिला दोपहर बाद भी जारी है। मेला प्रबंध समिति का कहना है कि आज शाम तक स्नान करने वालों की संख्या 75 लाख पहुंच सकती है। संगम की ओर लाखों कदम चले ही आ रहे हैं। सबके मन में बस त्रिवेणी में पुण्य की एक डुबकी लगाने की है। फिलहाल प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम कर रखे हैं। प्रशासन ने मौनी अमावस्या के दिन देशभर से 50 लाख लोगों के आने की संभावना व्यक्त की है। तैयारियों को परखने के लिए प्रदेश के मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्र भी रविवार को माघ मेला क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं। माघ मेले में सुरक्षा-व्यवस्था चाक-चौबंद है। मौनी अमावस्या पर साधु-संत संगम तट पर स्नान के लिए पहुंचे हैं। दतिया से आए महाकाल के साधक श्रृंगी ऋषि महराज ने भी संगम में डुबकी लगाई। सुमेरु पीठ के शंकराचार्य नरेंद्रानंद दंडी सन्यासी प्रबंधन परिषद के अध्यक्ष ब्रह्म आश्रम परिषद के संरक्षक शंकराचार्य महेशाश्रम, शंकर आश्रम और महामंडलेश्वर सतुआबाबा जी महाराज जगद्गुरू डां रामकमलदास वेदान्ती जी महन्त राजकुमारदास अयोध्या मंहन्त गोपाल दास महामंडलेश्वर माधवदास हिटलर बाबा महामंडलेश्वर संतोष दास ने मौनी अमावस्या पर साधु-संत संगम तट पर स्नान के लिए पहुंचे हैं। दतिया से आए महाकाल के साधक श्रृंगी ऋषि महराज ने भी संगम में डुबकी लगाई। मौनी अमावस्या का शुभ मुहूर्त महाकाल के साधक श्रृंगी ऋषि महराज ने बताया कि माघ माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या की तिथि 31 जनवरी 2022 को रात 02 बजकर 18 मिनट पर शुरू हुई। यह 01 फरवरी 2022, मंगलवार को पूर्वाह्न 11 बजकर 15 मिनट पर समाप्त होगी। इसदिन ब्रह्म मुहूर्त के समय स्नान करना विशेष फलदायी है।
*पुलिस प्रशासन के लिए इम्तिहान की घड़ी*
मौनी अमावस्या के स्नान को लेकर पुलिस प्रशासन को भी अलर्ट मोड में कर दिया गया है। सोमवार को कमिश्नर, जिलाधिकारी और एसएसपी ने भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। चप्पे-चप्पे पर पुलिस और सुरक्षा बल के जवाब तैनात किए गए हैं। श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की कोई समस्या ना हो और उन्हें इधर-उधर भटकना न पड़े, इसको लेकर जिलाधिकारी संजय खत्री ने सोमवार को बैठक की है। बैठक में सभी को सख्त दिशा-निर्देश जारी किया है। उनका कहना है लगभग 50 लाख से एक करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। ऐसे में रूट डायवर्जन की पहले ही व्यवस्था कर ली गई है। इसका कड़ाई से पालन किया जाएगा। कोविड-19 प्रोटोकॉल का पालन करें, समुचित दूरी बनाकर रखें और मास्क अवश्य लगाएं।
*संगम नोज की ओर लाखों श्रद्धालु चले ही जा रहे हैं*
*60 अधिकारी, 7000 पुलिसकर्मी रख रहे नजर*
मौनी अमावस्या की संभावित भीड़ को देखते हुए माघ मेला क्षेत्र में 45 प्रशासनिक अधिकारी और 15 पुलिस के अधिकारी तैनात किए गए हैं। इसके अलावा स्नाइपर्स और ब्लैक कमांडोज भी तैनात किए गए हैं। माघ मेला क्षेत्र में लगे कैमरों से निगरानी के लिए साइबर सेल की टीम को भी लगाया गया है। संगम टावर से भी संगम क्षेत्र के प्रमुख घाटों पर संदिग्ध गतिविधियों पर निगाह रखी जा रही है। माघ मेला क्षेत्र में ट्रैफिक कंट्रोल और व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए 7000 पुलिसकर्मी भी लगाए गए हैं।
*9 स्थानों पर लगाए गए वॉच टॉवर, 21 प्रवेश द्वार किए गए*
जिलाधिकारी संजय खत्री ने बताया कि माघ मेला क्षेत्र को पांच सेक्टर्स में बांटा गया है। मौनी अमावस्या के लिए कुल नौ स्नान घाट तैयार किए गए हैं। माघ मेले में प्रवेश के लिए द्वारों की संख्या बढ़ाकर 16 से 21 कर दी गई है। हर स्नान घाट पर वॉच टॉवर तैयार किए गए हैं। 9 वॉचटॉवर से माघ मेला क्षेत्र में हर पल निगरानी हो रही है। स्नान घाटों पर महिलाओं को कपड़ा बदलने के लिए 150 चेंजिंग रूम भी बनाए गए हैं। मेला क्षेत्र में आईसीसीसी में कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। श्रद्धालु किसी भी प्रकार की पूछताछ टोल फ्री नंबर्स 18001805440 और 18001805350 कर सकते हैं।
*अमावस्या तिथि पर स्नान-दान का है विशेष महत्व*
एस्ट्रोलॉजिस्ट और आईकास, प्रयागराज चैप्टर अध्यक्ष डॉ. गीता त्रिपाठी कहती हैं कि शास्त्रों में अमावस्या की तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। माघ मास की कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली अमावस्या की तिथि को मौनी अमावस्या के नाम से जाना जाता है। यह भी अमावस्या तिथियों में श्रेष्ठ और विशेष फलदायी है। किसी भी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत शुभकारी माना गया गया है। इसे माघी अमावस्या भी कहा जाता है। यह सभी अमावस्या तिथियों में विशेष है व फलदायी है। इसदिन गंगा किनारे स्नान, दान का विशेष महत्व है।
*बन जाता है गंगा जल अमृत*
ऐसी मान्यता है कि मौनी अमावस्या की इस तिथि पर गंगा जल अमृत के समान हो जाता है। मौनी अमावस्या के दिन गंगा में स्नान करने से सभी तरह के पापों का शमन हो जाता है। मोक्ष की प्राप्ति होती है।