
जगद््गुरु देव तीर्थ के अभिषेक दिवस पर संत-महात्मा हर्षित: शंकराचार्य नरेंद्रानंद
पीठाधीश्वर पद पर अभिषेक की 27वीं वर्षगांठ पर जगद्गुरु के माघ मेला शिविर में हुये कई आयोजन
*भारी संख्या में संत-महात्माओं व श्रद्धालुओं ने शंकराचार्य का किया स्वागत व अभिवादन*
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) । पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री अधोक्षजानंद देव तीर्थ जी महाराज ने देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में धार्मिक अनुष्ठानों को बढ़ावा देने की वकालत की है। उन्होंने चिंता व्यक्त की है कि बड़े संतों व महात्माओं की उपेक्षा के चलते भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों में धर्मान्तरण को बढ़ावा मिल रहा है। जगद्गुरु शंकराचार्य के पद पर अभिषेक होने के 27वें वर्ष के अवसर पर शंकराचार्य स्वामी श्री अधोक्षजानंद देव तीर्थ जी महाराज के माघ मेला स्थित शिविर में आज यज्ञादि अनुष्ठान का आयोजन था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जगद्गुरु अधोक्षजानंद देव तीर्थ ने कहा कि देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में वरिष्ठ संतों और महात्माओं के न पहुंचने से वहां के सनातन धर्मावलम्बियों में निराशा का भाव पनप रहा है। देश के वरिष्ठ संतों से जगद्गुरु शंकराचार्य ने अनुरोध किया है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में वे नियमित जायें और वहां धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन करें ताकि वहां रह रहे सनातन धर्मावलम्बियों का मनोबल बढ़े और धर्मान्तरण पर प्रभावी रोक लग सके। जगद्गुरु ने केंद्र और राज्य सरकारों से भी सीमावर्ती क्षेत्रों में विकास कार्यों को बढ़ावा देने को कहा है। उनका कहना है कि वहां विकास के कार्य हुये हैं और हो भी रहे हैं, लेकिन समयानुसार उसे और गति देने की आवश्यकता है। गौरतलब है कि शंकराचार्य अधोक्षजानंद देव तीर्थ देश के सीमावर्ती क्षेत्रों में नियमित जाते रहते हैं और वहां व्यापक स्तर पर यज्ञादि अनुष्ठान कराते रहते हैं। हाल में भी वह दस दिन के प्रवास पर पूर्वोत्तर भारत में थे और असम व अरुणाचल के सीमावर्ती क्षेत्रों में जाकर वहां के शिवालयों तथा अन्य देवालयों में विविध धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किये थे। स्वामी अधोक्षजानंद देव तीर्थ का वर्ष 1995 में प्रयाग अर्धकुम्भ के अवसर पर बसंत पंचमी के दिन पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य के पद पर अभिषेक हुआ था। अभिषेक की 27वीं वर्षगांठ के अवसर पर माघ मेला स्थित उनके शिविर में आज एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसके तहत यज्ञ और अन्य वैदिक अनुष्ठान सम्पन्न हुए। कार्यक्रम में उपस्थित संतों और दंडी संन्यासियों ने उनका पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र से स्वागत किया। इस अवसर पर जगद्गुरु शंकराचार्य ने भी कार्यक्रम में उपस्थित संत-महात्माओं एवं श्रद्धालुओं को कंबल वितरित सभी को अपना शुभाशीष दिया। इस अवसर पर काशी सुमेरु पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री नरेंद्रानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि दो फरवरी 1995 को बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर तत्कालीन अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत ज्ञानदास और कई अन्य वरिष्ठ संतों की उपस्थिति में स्वामी अधोक्षजानंद देव तीर्थ का पुरी पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य के पद पर वैदिक विधि विधान से अभिषेक हुआ था। शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि जगद््गुरु देव तीर्थ के अभिषेक दिवस पर सभी संत-महात्मा हर्षित हैं और इस अवसर को हम सब उल्लासपूर्वक मना रहे हैं। उन्होंने स्वामी अधोक्षजानंद देव तीर्थ को अंगवस्त्र व माला पहनाकर उनका अभिवादन भी किया। कार्यक्रम में मुख्य रुप से निर्मोही अनी अखाड़ा चित्रकूट के श्रीमहंत शिवराम दास, नैमिशारण्य के महंत रामआश्रम, स्वामी जगदीश आश्रम, महामंडलेश्वर झंडा बाबा, गोरक्षनाथ मंदिर गोरखपुर के मठ पुरोहित वेदाचार्य रामानुज त्रिपाठी, ज्योतिषाचार्य अजय पाठक समेत तमाम संत-महात्मा व श्रद्धालु उपस्थित रहे।