गंगा जमुनी तहज़ीब के मार्केज़ इल्म अदब के शहर प्रयागराज मे शैख़ कबीर शाह मुहिब उल्लाह इलाहाबादी दादा मियां सरकार का 375 वाँ सालाना उर्स मुबारक

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। पीरजादों की बाग नई बस्ती कीडगंज स्थित दरगाह पर गुरुवार 10 फरवरी को शेख मुहीबउल्लाह इलाहाबादी दादा मियां सरकार का 375वां उर्स मनाया जाएगा। इस साल यह आयोजन सरकारी गाइडलाइन का पालन करते हुए सादगी से मनाया जा रहा है। बताया गया है कि सूफी संत शेख मुहीबउल्लाह इलाहाबादी हिंदी के शिरोमणि कवि सूरदास, कबीरदास व तुलसीदास के समकालीन थे। यूपी गजेटियर के अनुसार इन्होंने अरबी व फारसी में अनेक पुस्तकों की रचना की है। इनकी समस्त रचनाएं सांप्रदायिक सद्भावना का संदेश देती हैं।
शेख मुहीबउल्लाह इलाहाबादी मखदूम साबिर पाक बाबा फरीद गंजेशकर, ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी गरीबनवाज के चिश्ती सबरी शाखा मे हैं। भारत में शेख साहब को वहदतुल वजूद का सबसे बड़ा प्रवक्ता मना जाता है इसलिए आपको इब्ने अरबी हिंदी भी कहा जाता है।
मुगल सम्राट शाहजहां का बड़ा बेटा शहजादा दारा शिकोह शेख साहब से बड़ी अकीदत रखता था और शेख साहब को अपना आध्यात्मिक गुरु भी मानता था। इसका ज़िक्र दारा शिकोह ने अपनी अनेक पुस्तकों में किया है
एक बार दारा शिकोह ने शाह मुहिबउल्लाह से कुछ महत्वपूर्ण विषयों पर राय जानना चाहा जिसमें एक विषय यह भी था कि हुकूमत के कार्य कलापों में हिन्दू एवं मुसलमान में भिन्नता करना उचित है अथवा नही,शाह मुहिबउल्लाह ने इसके उत्तर में दारा शिकोह को लिखा कि (अनुवाद) “फकीर कहां और नसीहत कैसी सच बात तो यह है कि खल्के खुदा का ध्यान प्रशासक को होना चाहिए क्या हिंदू व मुसलमान सब पर रहम करना बादशाहों के लिए यही उचित है। और जब फैसला देना तो ये मत देखना कौन हिन्दू है और कौन मुसलमान बल्कि ये देखना कौन सच पर है बादशाहों की यही पहचान है। रसूल ने कुरान के माध्यम से फुतूहाते मक्किया में इस बात को वर्णित किया है कि ‘वमा अर सलनाकुम इल्लारहमतुल आलमीन’ किसी एक के लिए आप नहीं भेजे गये अर्थात पूरी दुनिया के लिए आप रहमत है ।
शेख साहब के बारे में ख्यात है कि इन्होंने सदैव हिंदू-मुस्लिम एकता पर बल दिया, जिसके कारण दोनों ही संप्रदाय के लोग शेख साहब के अनुयायी बने। सभी में उनके प्रति अपार श्रद्धा है। साथ ही 11 फरवरी शुक्रवार को बहादुरगंज स्थित खानकाह दाएरा शाह मुहिबउल्लाह शैख़ साहब के घर पर महफिल समा सूफियाना गीत की महफिल का भी आयोजन किया गया है।

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