प्रशासन ने विवादित बयानों को अचार संहिता का उल्लंघन मानकर नोटिसें की जारी

चुनावी सरगर्मी में माननीयों के बिगड़ते बोल

( अनुराग शुक्ला )
प्रतापगढ़ ( अनुराग दर्शन समाचार ) । इस चुनावी समर में जहां सर्दी का आलम हो वहीं राजनीतिक तपिश इतनी बढ़ती जा रही है कि माननीयों द्वारा एक दूसरे पर तीखे शब्द बाणों का प्रहार चरम पर है।संजीदगी या मर्यादा का अब सवाल ही नहीं रहा। बातें जितनी कड़वी होंगी और भाषण में सुर, लय का कलात्मक उतार चढ़ाव हो,वही माननीय गुणी और सफ़ल वक्ता के रूप में सिद्धस्त और प्रबल नेता मान लिया जाता है।इधर दस दिनों से स्थिति बद से बदतर होती जा रही है।ऊपर से लेकर नीचे तक सभी दिग्गज माननीयों के बोल इस चुनावी दंगल में बेहद बिगड़ चुके हैं।इतने शर्मनाक बयान और तीखी टिप्पणियां आ रही हैंतब सोचने को हो जाता है कि उच्च सम्मानित नेता द्वारा ऐसा भी तल्ख़ उच्चारण किया जाता है जो स्तब्धकारी है।शीर्षस्थ और पदस्थ माननीयों के बोलचाल, भाषा-शैली इतनी अमर्यादित हो चली हैं तो प्रदेश व जिले स्तर के नेताओं में भी वही गुण आना लाज़मी है।आये दिन टीवी चैनल पर अथवा समाचार पत्रों में शीर्ष नेताओँ चाहे वे किसी पार्टी के हों, कटुपूर्ण शब्दों और वाक्यों का प्रयोग बेहिचक किया जा रहा है जो जिला स्तर पर माननीयों और कार्यकर्ताओं के मध्य नफ़रत और दुश्मनी की खाई बन जाती है और जान पर आफ़त तक आ पड़ती है ऐसा ही कुछ नज़ारा यहां के कुछ माननीयों और प्रत्याशियों में भी परस्पर वार पलटवार चरम पर है जबकि चुनाव आयोग ने अमर्यादित टिप्पणियों गाली, धमकी, जातिगत टिप्पणी पर प्रतिबंधित किया है पर इसका उल्लंघन खुलेआम हो रहा है।
प्रतापगढ़ के विधानसभा कुन्डा पट्टी और रानीगंज में फ़िलहाल ऐसे मामले देखने में आ रहे हैं। मसलन मतगणना तक चुप रहेंगे। गुंडों की गर्मी निकाल देंगे। हमें सवर्णो का वोट नहीं चाहिए आदि।जबकि प्रशासन ने विवादित बयानों को अचार संहिता का उल्लंघन मानकर नोटिसें जारी किया है।यही नहीं, कुन्डा में सपा प्रत्याशी के समर्थन में बग़ैर प्रशासनिक अनुमति बाइक रैली अभी हाल में निकाली गई थी जिसमें लगभग 150 लोगों पर आचार संहिता के उल्लंघन में कुन्डा कोतवाली में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

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