
महीने भर कल्पवासियों से गुलजार रहे मेले में तंबुओं को समेटने का काम तेज
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) । फाल्गुन की तृतीया पर शुक्रवार को त्रिजटा शुरू हो गया। भोर से ही श्रद्धालु स्नान-दान कर रहे हैं। मान्यता है कि त्रिजटा स्नान से संपूर्ण माघ मास के स्नान का पुण्यफल मिलता है। इस अवसर पर संतों और माघ पूर्णिमा के बाद शिविरों में रुके कल्पवासियों ने भी स्नान, ध्यान का पुण्य फल अर्जित किया। महीने भर कल्पवासियों से गुलजार रहे मेले में तंबुओं को समेटने का काम तेज हो गया है।हालांकि खाक चौक में कुछ संतों के शिविर महा शिवरात्रि तक रहेंगे। त्रिजटा स्नान की यह है मान्यता शास्त्रों में त्रिजटा स्नान की मान्यता त्रेता युग में सीता के पंचवटी प्रवास से जुड़ी है। रावण जब मां सीता का हरण कर उनको लंका ले गया था, तब त्रिजटा नामक राक्षसी ने उनकी सेवा की थी। वह उनकी निगरानी में लगाई गई थी, लेकिन उसने सीता के प्रति श्रद्धा व समर्पण से मोक्ष प्राप्त कर लिया था। इस निमित्त त्रिवेणी में स्नान-दान करके पुण्य अर्जित करते हैं।