रूस और यूक्रेन युद्ध : कानपुर के सात विद्यार्थी भूमिगत मेट्रो स्टेशनों और हास्टल के बेसमेंट में छिपे खारकीव और राजधानी कीव में भीषण युद्ध छिड़ा,कर्फ्यू लगा

कानपुर(आरएनएस)। रूस और यूक्रेन में चल रहे युद्ध के बीच शहर के 39 छात्रों के यूक्रेन में फंसे होने की बात सामने आई है। यह संख्या अभी और बढ़ सकती है। इनमें से अभी सिर्फ दो छात्रों वैभव वर्मा और सहरिश सिद्दीकी की घर वापसी हो सकी है।

*दहशत के साए में मदद का इंतजार*

37 छात्र अभी भी यूक्रेन में ही हैं।जिला मुख्यालय के कंट्रोल रूम से जारी सूची में बताया गया है कि इन सभी छात्रों को वापस लाने के इंतजाम किए जा रहे हैं। इसके लिए सभी के नाम रोजाना शासन को भेजे जा रहे हैं। यूक्रेन के शहर खारकीव और राजधानी कीव में भीषण युद्ध छिड़ा हुआ है। आसमान से रूस की सेना गोले बरसा रही है। इन सबके बीच कानपुर के सात विद्यार्थी भूमिगत मेट्रो स्टेशनों और हास्टल के बेसमेंट में छिपे हुए हैं। कीव में भी तीन छात्र-छात्राएं दहशत के साए में मदद का इंतजार कर रहे हैं। इन दोनों शहरों में कर्फ्यू है और बाहर देखते ही गोली मारने के आदेश हैं। खारकीव के मेट्रो स्टेशन में खड़ी ट्रेन के अंदर फंसी दर्शन पुरवा निवासी जेनसी ने बताया कि यहां के विभिन्न मेट्रो स्टेशन में बंकर बना दिए गए हैं, जिसमें 100 से ज्यादा भारतीय छात्र हैं। बाथरूम के पानी से प्यास बुझानी पड़ रही है। आसपास की सुपर मार्केट पर भी बम गिरे हैं। अब खाने-पीने का सामान नहीं मिल रहा। कुछ चने बचे हैं, उन्हें भिगोकर खा रहे हैं। रविवार को फिर एडवाइजरी जारी की गई है कि अगर किसी छात्र को जाना है तो यूक्रेन की ट्रेन से बॉर्डर तक जाएं। ग्रुप बनाकर निकले लेकिन खारकीव के पूर्वी हिस्से में लगातार बमबारी से आगे बढ़ना मुश्किल हो रहा है। मेट्रो स्टेशन के आसपास भी रूसी सेना है। कीव में फंसी आकांक्षा ने बताया कि पड़ोसी देशों के बॉर्डर तक पहुंचाने के लिए विशेष समय पर ट्रेन चलाई जा रही हैं। उसमें यूक्रेन के नागरिकों को प्राथमिकता दी जा रही है। रविवार को वह ट्रेन पकड़ने गए तो ट्रेन में चढ़ने नहीं दिया गया। दूतावास ने बताया था कि ट्रेन की तीन बोगी में भारतीय छात्र जाएंगे।

*चार छात्र किसी तरह रोमानिया बॉर्डर जा सके,बाकी लौट आए*

आवास विकास केशव पुरम निवासी हेमंत कुमार ने फोन करके पिता सुरेश चंद्र को बताया कि वाहन चालक ने लेबिन से पोलैंड बॉर्डर तक 90 किमी आने में 20 हजार रुपये ले लिए। रास्ते में 30 किलोमीटर लंबा जाम मिला। बार्डर से 12 किमी पहले ही टैक्सी चालक ने छोड़ दिया। सुरेश चंद्र ने कंट्रोल रूम में फोन कर बेटे को लाने की गुहार लगाई।

*छात्रों के साथ हो रही मारपीट*

नौबस्ता बसंत विहार की गरिमा तिवारी और कल्याणपुर अंबेडकरपुरम की सृष्टि यादव डेनिप्रो विवि के हॉस्टल में हैं। गरिमा ने पोलैंड बार्डर पर फंसे छात्रों का एक वीडियो भेजकर बताया कि वहां छात्रों के साथ मारपीट की जा रही है। उनके यहां से कुछ छात्र अलग से वाहन बुक करके रोमानिया बार्डर पहुंच रहे हैं। हास्टलों में खाने पीने का सामान खत्म हो रहा है।

*बच्चों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना*

भाभा नगर चकेरी की कोमल यादव वेनिस्टिया में एमबीबीएस चौथे वर्ष की छात्रा है। उन्होंने बताया कि वेनिस्टिया में शांति थी, लेकिन शनिवार को कर्फ्यू लगा दिया गया। सायरन बजने लगे,मार्शल ला लागू हो गया। वह करीब 500 छात्र-छात्राओं के साथ बार्डर पर हैं। बार्डर पर तैनात अधिकारी दस्तावेज जांचने में 40 मिनट का समय ले रहे हैं।
एलआइजी बर्रा के दैव्यम वाजपेयी, नौबस्ता के साकेत राजपूत, नवाबगंज की गार्गी गुप्ता,केशवपुरम आवास विकास के हेमंत कुमार,शास्त्री नगर की निधि त्रिवेदी,हरजिंदर नगर की आकांक्षा शुक्ला,पनकी एफ ब्लाक के तुषार निगम,गंगा विहार के निर्दोश सिंह,कल्याणपुर की साक्षी सचान और पनकी के विवेक कुमार के स्वजन ने कलेक्ट्रेट में बने कंट्रोल रूम में संपर्क किया है। स्वजन बच्चों की सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना कर रहे हैं।
रोमानिया जाने के लिए काफी मुश्किलें आईं। मिला वीजा पनकी सी ब्लाक निवासी विवेक गुप्ता इवानो फ्रेंक्विस नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे हैं। उन्हें यूक्रेन से रोमानिया जाने के लिए काफी मुश्किलें आईं। बहन पद्मिनी गुप्ता ने कलेक्ट्रेट के कंट्रोल रूम पहुंचकर अधिकारियों से बात की। भाई विपिन ने बताया बताया कि भाई विवेक को वीजा मिल गया है। अब वह वहां से रोमानिया पहुंच गए हैं। जल्द ही आएंगे।

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