
यूक्रेन से वापस लौटी राधिका ने बताई जमीनी सच्चाई
मथुरा( अनुराग दर्शन समाचार )। ब्रज में होली का उल्लास है। 10 मार्च को बरसाना में विश्व प्रसिद्ध लाठा मार होली होगी। बरसाना राधा जी का धाम है। लेकिन आज हम आप को बरसाना की उस राधिका के बारे में बता रहे हैं जिन्हें भारत में पढने की इच्छा के बावजूद यूक्रेन जाना पडा। बरसाना धाम के यादव मौहल्ला के रहने वाले बरसाना के जगदीश गोयल की पुत्री राधिका युद्धग्रस्त के यूक्रेन के इवानो शहर से किसी तरह रोमानिया के बार्डर से हुए हुए सुरक्षित अपने वतन वापस लौटी हैं। वह अपने परिजनों के साथ खुद को बेहद खुश नशीब मान नहीं हैं। राधिका उन साथियों के लिए अभी भी चिंतत हैं जिनकी वतन वापसी नहीं हो सकी। बरसाना के यादव मौहल्ला स्थित अपने घर पर राधिका ने बताया कि वह भारत मंे ही पढना चाहती थीं। यूक्रेन के इवानों शहर से एमबीबीएस की पढाई कर रहीं राधिका का कहना था कि एक तो यहां आरक्षण बहुत ज्यादा है। मैं सामान्य वर्ग से आती हूं, नीट की परीक्षा अनिवार्य होती है। नीट के इतने नम्बर लाने की हर किसी की क्षमता नहीं होती है। इसके बाद वह काॅलेज आवंटन कराएं। फीस इतनी ज्यादा है कि यहां फीस, होस्टल फीस, एग्जाम फीस को मिला कर लगभग एक करोड खर्चा बैठता है। मिडिल क्लास परिवार के लिए यह संभव नहीं है कि एक करोड रूपये का इंतजाम कर पाएं। एमबीबीएस के बाद मास्टर डिग्री के लिए और भी मेहनत करनी होती है। हर किसी के पास इतना बजट नहीं हो पता है। नीट वहां पर सिर्फ पास करना होता है, नीट के क्वालीफाई का हमारा स्कोर कार्ड लगता है। इसके बाद आपको यूनिवर्सिटी मिल जाती हैं। राधिका ने बताया कि आॅनलाइन क्लास चल रही हैं। यूनिवर्सिटी की ओर से कहा गया है कि अंतिम दम तक वह उन्हें नहीं छोडेंगे। उन्होंने बताया कि उन्हें पूरी उम्मीद है कि उनके साथ सबकुछ अच्छा होगा।
कैसे वतन वापस लौटीं राधिका
हम लोगों ने मदद के लिए कई वीडियो बनाए ट्विीट भी किए ताकि एम्बेसी हम लोगों की तरफ ध्यान दे। एम्बेसी ने पहले ही जबाव में प्रतिक्रिया दी कि हर बच्चे को जल्द से जल्द उनके घर पहुचाएंगे। राधिका ने बताया कि वहां 20 हजार बच्चे रहते हैं। एम्बेसी पहले शुरूआत में काॅल उठा भी रही थी, जबाव भी दे रही थी। उसके बाद उन्होंने बोला कि फेसबुक और ट्वीटर पर उन्हें फालो करें और उनकी जो एडवाइजरी आए उस का अनुशरण करें। गाइडलाइन के अनुशार चलें। भारत सरकार ने बहुत जल्दी और अच्छी प्रतिक्रिया दी, हम लोगों को खाने पीने और रहने का इंतजाम किया। वहां पर 20 हजार से ज्यादा बच्चे हैं, एक फ्लाइट में 250 से ज्यादा बच्चे नहीं आ सकते। एक साथ इतनी फलाईटें नहीं जा सकतीं और नहीं बार्डर क्रास किया जा सकता है। इसके लिए कम से कम 90 से 100 फ्लाइटें चाहिए होती हैं। एक दिन में लाना आसान नहीं हैं। वह धीरे धीरे पहले बार्डर क्रास करा रहे हैं और फिर उन्हें भेज रहे हैं। बच्चों को रहने किए होटल, कैंप, एजनीओ की हल्प से मदद कर रहे हैं।