
महाभारत युग में पाण्डवों ने यहां गुजारा था अज्ञातवास,की थी कुलदेवी की स्थापना
जनप्रतिनिधियों ने प्राचीन मंदिर के विकास में नही दिखाई कोई दिलचस्पी
दूर-दूर से आते हैं यहां श्रद्वालु, माता के आर्शीवाद से होतीं हैं पूरी मनोकामनाएं
ललितपुर( अनुराग दर्शन समाचार )। श्रीश्री 1008 श्री वैरावट धाम क्षेत्र में काफी प्राचीन मंदिरों में शुमार है। मंदिर का इतिहास महाभारत के इर्द गिर्द घूमता है। माना जाता है कि महाभारत के युग में श्री वैरावट धाम में पांडवों ने यहां अज्ञातवास गुजारा था। इसके साथ ही अपनी आस्था प्रकट करते हुये उन्होनें यहां वैरावट माता को अपनी कुलदेवी मानकर मंदिर का निर्माण कराया था। तब से लेकर अब तक यहां श्रद्वालुओं का प्रतिदिन तांता लगा रहता है। मान्यता है कि यहां आने पर लोगों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। लेकिन यह क्षेत्र आज भी उपेक्षा का शिकार है। यहां आने जाने के लिए कोई पक्का सम्पर्क मार्ग नही है। खेतों से होकर पंगडंडी के सहारे ही मंदिर में पहुंचा जाता है। बाकी दिनों तो श्रद्वालु आसानी से धाम में पहुंचते हैं, किन्तु बरसात के दिनों में खेतों से होकर गुजरने में उन्हे भारी असुविधा होती हैं। अपनी मनोकामना पूर्ण करने को दूर दूर से यहां लोग आते हैं। इतना ही नही वैरावट धाम में विधुत व्यवस्था का कोई इंतजाम नही हैं। इतने जनप्रतिनिधि आये और गये, लेकिन किसी ने प्राचीन मंदिर के लिए कुछ भी नही किया। चुनाव के समय कई जनप्रतिनिधि यहां आकर कई वायदे करते हैं, किन्तु चुनाव जीतने के बाद उनके वायदे ठण्डे बस्ते में चले जाते है। बताते चलें कि अभी तक जो भी व्यक्ति श्री वैरावट माता मंदिर धाम से जुडा है, उसने ही मंदिर के विकास के लिए अपनी सामर्थ के अनुसार विकास किया है। पहले की अपेक्षा अब मंदिर में जो भी है विकास दिखता है। लेकिन मंदिर के लिए कई प्रकार का विकास अभी बाकी है। जिसमें मुख्य संपर्क मार्ग, विघुत व्यवस्था प्रमुख है। नवरात्रि के मौकों पर श्रद्वालुजन यहां आकर कन्याभोज कराते हैं, और मंदिर में दान पुण्य भी करते है। रविवार को गांधीनगर के प्रमुख धर्मालंबियों ने श्री वैरावट धाम पहुंचकर भंडारा आयोजित कराया। सर्वप्रथम उन्होनें माता को प्रसाद अर्पित कर परिवार मे सुख समृद्वि की कामना की। वहीं मंदिर के विकास के लिए आपस में विचार विमर्श हुआ। इस दौरान दयानंद तिवारी सेटू महराज, हरी साहू, मंजीत करौसिया, विनय जोशी, रानू परोचे, देवेन्द्र साहू, शंकर साहू, सीताराम सेन, भूरे सोनी सहित अनेकों श्रद्वालुजन मौजूद रहे।