रुस-यूक्रेन युद्ध : विवि के अधिकारी गुमराह करते रहे बोले,कुछ नहीं होगा,आप पढ़ाई करो

इंडियन दूतावास ने की मदद, दो दिन तक हॉस्टल में रुकवाया,खाने पीने की व्यवस्था कराई

कानपुर( अनुराग दर्शन समाचार )। नवाबगंज के पहलवान पुरवा निवासी यूपीसीडा के सेवानिवृत्त कर्मी रामशंकर की बेटी अंशुमा गौतम भी शनिवार रात को कानपुर लौट आईं। आठ दिन तक अंशुमा और उनकी सहेलियों ने यूक्रेन से हंगरी तक परेशानियां उठाईं और भीषण ठंड में जैसे-तैसे खुद को सुरक्षित रखकर आगे बढ़ती रहीं। लौटने के बाद वह भी अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं।
अंशुमा ने बताया कि वह डेनिप्रो मेडिकल विवि से एमबीबीएस तीसरे वर्ष की छात्रा हैं। रूस और यूक्रेन के बीच हालात तनावपूर्ण हो रहे थे,लेकिन विवि के अधिकारी ही गुमराह करते रहे। बोले, कुछ नहीं होगा, आप पढ़ाई करो। 24 को जब कीव व खारकीव में हमला हुआ तब तक देर हो गई थी। तमाम बच्चे तो कीव गए,लेकिन फ्लाइट निरस्त होने से वहीं पर फंस गए। हालांकि हम दो दिन तक बंकरों में छिपे रहे और 27 तारीख को 15 अन्य साथियों के साथ ट्रेन से उजरोड गए। 20 घंटे तक ट्रेन में टॉयलेट के पास खड़े होकर सफर किया। उजरोड से चाप बॉर्डर पर और छह घंटे लाइन में लगे रहने के बाद हंगरी के जहोनी के लिए ट्रेन मिली। इससे पहले बार्डर पर साउथ अफ्रीका के लोगों ने काफी अभद्रता व झगड़ा भी किया। उस पर ठंड से बेहाल हो गए। जहोनी से एक मार्च को ट्रेन में बुडापेस्ट गए, जहां हमें इंडियन दूतावास की मदद मिली। दूतावास के अधिकारियों ने दो दिन तक एक हॉस्टल में रुकवाया और खाने पीने की व्यवस्था कराई। तीन तारीख को फ्लाइट मिली और चार मार्च की सुबह हम दिल्ली पहुंचे। अंशुमा ने कहा कि हम डॉक्टर बनने के लिए मेहनत कर रहे हैं, अब क्या होगा, कुछ नहीं कह सकते। विवि की ओर से अभी तक कोई मैसेज नहीं आया।

Exit mobile version