घर-गृहस्थी का त्याग करके धर्म के लिए जीवन समर्पित करने वाले व्यक्ति संत कहलाते हैं-शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम जी

कुरुक्षेत्र (अनुराग दर्शन समाचार )। सनातन ज्ञान पीठ के पीठाधीश्वर व अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के संरक्षक जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम जी महाराज ने कहा कि कई कथावाचक व्यासपीठ पर आसीन होकर किसी दूसरे के एजेंडे पर काम कर रहे हैं। सरकार को ऐसे कथावाचकों के संपर्कों व कार्यों की जांच करनी चाहिए। जांच होने पर कई चौंकाने वाले रहस्य लोगों के सामने आएंगे। शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम ने कहा कि सनातन धर्म विरोधी ताकतों में हिंदुओं से सीधे मोर्चा लेने का माद्दा नहीं है। वह हिंदुओं को बांटने व भ्रमित करने के लिए तरह-तरह का कुचक्र रचती रहती हैं। कहीं, कथावाचक भी उनके साथ मिलकर देश व सनातन धर्म विरोधी कार्यों में लिप्त तो नहीं हैं, उसकी पड़ताल करना जरूरी है। कहा कि कथावाचक कहने को सनातन धर्म का प्रचार करते हैं। लेकिन उनकी वास्तविकता कुछ और होती है। ऐसे कई चेहरे इधर बेनकाब होने लगे हैं। उन्होंने कथावाचकों को संत व महात्मा कहने पर आपत्ति व्यक्त की। बोले, संत वह होता है, जो धर्म के लिए सर्वस्व न्यौछावर कर दे। घर-गृहस्थी का त्याग करके धर्म के लिए जीवन समर्पित करने वाले व्यक्ति संत कहलाते हैं।
शंकराचार्य स्वामी महेशाश्रम ने कहा कि कोरोना जैसी महामारी फैलने का प्रमुख कारण पर्यावरण असंतुलन है। पेड़ों की संख्या कम होने, नदियों के सूखने से पर्यावरण का असंतुलन बढ़ रहा है। मानव का जीवन पर्यावरण की रक्षा करने से ही सुरक्षित होगा। इसके मद्देनजर दंडी संन्यासी धर्म के साथ पर्यावरण बचाने के लिए योगदान देंगे। नदियों व पेड़ों के संरक्षण की मुहिम देशभर में चलेगी। दंडी संन्यासी लोगों में जाग्रति फैलाने के साथ श्रमदान भी करेंगे।

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