रंगभरनी एकादशी पर चहुंओर उडा गुलाल

मंदिरों में उमडा श्रद्धालुओं का रैला

श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर खेली गई लठामार होली

( अनुराग शुक्ला )मथुरा( अनुराग दर्शन समाचार )। रंगभरनी एकादशी पर्व पर मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड उमडी। चारांे तरफ भक्तांे के टोल मस्ती में सराबोर होकर भक्ति के रस में गोते लगाते रहे। रस रसिया के रंगोत्सव में आनंद रस का अद्भुत वर्षण हो रहा है। बांके बिहारी लाल के दरबार में हर कोई मस्ती के रस में सराबोर है। चहुंओर रंग अबीर गुलाल की सप्तरंगी छटा का मनोहारी दृश्य है। रंगभरीन एकादशी पर ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर, ठा. द्वारकाधीश, श्रीकृष्ण जन्मस्थान, राधावल्लभ मंदिर सहित सप्त देवालायों में प्रेमभाव से अपने आराध्य के साथ होली खेली। मंदिरों में श्रद्धालुओं के उपर जमकर अबीर गुलाल उडाया गया। स्वामी हरिदास जू के लाडले बांकेबिहारी लाल अपने भक्तो के साथ होली खेल रहे है। धवल श्वेत वस्त्र धारण कर ठाकुर बांकेबिहारी लाल के श्रंगार आरती के बाद जैसे ही पट खुले मन्दिर परिसर रास रचैया की जयजयकार से अनुगुंजित हो उठा। अद्भुत नजारा,सेवायत गोस्वामी स्वर्ण रजत निर्मित पिचकारियों से सोने चांदी के पात्रों में भरे टेसू के फूलों से निर्मित प्राकृतिक रंगों की बौछार भक्तो पर डाल रहे है। भक्त भी अपनी सुधबुध खोकर रंग प्रसादी में तनमन भिगोने को बेकरार है। सम्पूर्ण मन्दिर परिसर में रंग बिरंगे अबीर गुलाल की बदरी सी छा रही है। एक तरफ सेवायत गोस्वामीजन द्वारा होली के रसियाओं का पारम्परिक गायन और दूसरी ओर बांके बिहारी लाल के जयकारे वातावरण में मस्ती का रस घोल रहे थे। जिसके रसरंग में हर कोई गोते लगाने को लालायित था। रंग प्रसादी का एक कण पाने को भी भक्तांे में होड़ सी मची थी। फाल्गुन शुक्ल पक्ष की एकादशी से शुरू हुआ आनंद रस वर्षण का यह क्रम फाल्गुन शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तक अनवरत रूप से जारी रहेगा।

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