ब्रज की चौरासी कोस परिक्रमा करने से मिलता है अक्षय पुण्य – स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज

( अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) । अखिल भारतीय दंडी संन्यासी परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज के नेतृत्व में ब्रज की चौरासी कोस परिक्रमा यात्रा 21 मार्च सोमवार सुबह 7:00 बजे से वृंदावन स्थित श्री विश्वनाथ धाम दंडी आश्रम सोनरख रोड से शुरू होगी।

ब्रज की यह सात दिवसीय परिक्रमा होगी और 28 मार्च को परिक्रमा की पूर्णाहुति होगी। परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष पीठाधीश्वर स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज ने बताया कि यह चौरासी कोस की वह यात्रा है जहां पर भगवान श्री कृष्ण ने बचपन में बाल- बाल लीलाएं करते हुए सनातन धर्म को एक नई ऊंचाई दी तो वहीं दूसरी ओर उन्होंने एक से एक मायावी राक्षसों का वध भी किया।

उन्होंने कहा कि यह यात्रा ब्रज में 82 स्थानों पर होती है जबकि राजस्थान के भरतपुर और हरियाणा के पलवल में जाकर पूरी होती है । उन्होंने बताया कि भगवान कृष्ण के पालक माता – पिता यशोदा और नंद ने मन्नत मांगी थी कि जब उनके कोई पुत्र या पुत्री होगी तो वह सभी तीर्थ स्थलों का दर्शन और परिक्रमा करेंगे। भगवान कृष्ण ने वयोवृद्ध माता यशोदा और नंद से उनकी मन्नत सुनी तो उन्होंने कहा कि उनको इस अवस्था में कहीं जाने की जरूरत नहीं है बल्कि सभी देवी, देवता, तीर्थ, यक्ष, गंधर्व और किन्नर सभी लोग ब्रज में ही वास करेंगे और जो यहां की परिक्रमा करेगा उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होगी।

इसके बाद से ब्रज के चौरासी कोस वह स्थान जहां भगवान श्री कृष्ण ने बचपन में बाल लीलाएं करते हुए दानव- राक्षसों का वध किया था उन स्थानों की लोग ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा करने लगे। इस परिक्रमा करने से लोगों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है और वह मोक्ष के भागीदार होते हैं।

परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी ब्रह्माश्रम महाराज ने कहा कि लोगों को चाहिए कि कम से कम अपने जीवन में एक बार, दो बार हो सके तो अधिक से अधिक बार मथुरा, वृंदावन सहित ब्रज के चौरासी कोस की परिक्रमा करते हुए सनातन धर्म की मजबूती पर जोर दें। उन्होंने कहा कि आज भी सिर्फ तीन जगह की परिक्रमा होती है। पहला नैमिषारण्य, दूसरा अयोध्या की परिक्रमा और तीसरी ब्रज की परिक्रमा होती है। उन्होंने कहा कि यहा आने से लोगों की मनोकामनाएं पूर्ण होती है और उनका और उनके पूर्वजों का जन्म – जन्मांतर बनता है वह यश के भागी होते हैं ऐसे में लोगों को चाहिए कि वह ब्रज की परिक्रमा एक बार जरूर करें।

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