Lori लोरी का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग शिशुओं को नींद के लिए: प्रधानाचार्य

प्रयागराज(अनुराग दर्शन समाचार )। लोरी Lori प्राचीन काल से ही मौजूद रही है। लोरियों का संस्कार हमारे कानों में बचपन से ही घोला जाता था। जो आज इस आधुनिक जीवन में अपने अस्तित्व को तलाश कर रही है और मृतप्राय है।

गनीमत है फिल्मों की जिसमें यदा-कदा लोरियां सुनाई पड़ जाती है। लोरी का सबसे महत्वपूर्ण उपयोग शिशुओं को नींद के लिए किया जाता है। यह बातें रानी रेवती देवी सरस्वती विद्या निकेतन इंटर कॉलेज, राजापुर में विद्यालय के प्रधानाचार्य बांके बिहारी पांडेय ने अभिनव रंगमंडल प्रयागराज द्वारा “आजादी का अमृत महोत्सव“ कार्यक्रम के अंतर्गत विलुप्त हो रही लोरी गायन परम्परा की प्रतियोगिता का उद्घाटन करते हुए कही। इस अवसर पर विद्यालय के 73 छात्र-छात्राओं ने बढ़-चढ़ कर भाग लिया और लोरी गायन की सुंदर प्रस्तुति की।

बच्चों के उत्साहवर्धन हेतु पुरस्कार के रुप में नगद धनराशि प्रथम पुरस्कार 1000, द्वितीय पुरस्कार 700 एवं तृतीय पुरस्कार 500 तथा सांत्वना पुरस्कार के रुप में 100 रूपये रखा गया। सभी भाग लेने वाले प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया। निर्णायक मंडल में मनोज गुप्ता, दिनेश कुमार शुक्ला एवं रिचा गोस्वामी शामिल रहे।

लोरी गायन प्रतियोगिता में कक्षा पंचम की कात्यायनी मिश्रा ने प्रथम स्थान, कक्षा पंचम की शिवांगी राय द्वितीय तथा कक्षा एकादश की रोशनी कुमारी एवं कक्षा सप्तम की अभिश्री सिंह ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इसी प्रकार सुहाना सिद्दीकी, नम्रता द्विवेदी, प्रतीक्षा साहू, हेमा द्विवेदी, रागिनी यादव, अर्पिता कोहली, विदुषी चौधरी, इशिका कुशवाहा एवं नैंसी कुमारी सांत्वना पुरस्कार मिला।

अभिनव रंगमंडल के निर्देशक शैलेश श्रीवास्तव ने बताया कि लोरी या पालना गीत बच्चों के लिए एक सुखदायक गीत या संगीत का टुकड़ा है जो बच्चों के लिए गाया जाता है। उन्होंने बताया कि इन सभी सफल प्रतिभागियों को विद्यालय में होने वाले 27 मार्च के कार्यक्रम में सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम को सफल बनाने में अर्चना राय, रुचि चंद्रा, कविता पांडेय, किरन सिंह एवं अभिनव रंगमंडल की तनु सोनकर, रितिक श्रीवास्तव, आकाश मौर्य, हर्ष श्रीवास्तव एवं सर्वेश प्रजापति सहित विद्यालय के समस्त शिक्षक शिक्षिकाओं का सहयोग रहा।

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