कालरात्रि में अघोरियों के लिए शिवपुर शमशान तंत्र साधना का प्रमुख केन्द्र-बजरंगमुनि उदासीन

धर्म डेस्क। महंत बजरंगमुनि उदासीन ने बताया कि तांत्रिक साधना दो प्रकार की होती है- एक वाम मार्गी दूसरी दक्षिण मार्गी।अघोरपंथ में विभिन्न प्रकार की सिद्धियों का उल्लेख किया गया है, जिन्हें ज्ञान और शक्ति प्राप्त करने के लिए हासिल किया जाता है। प्रमुख रूप से 10 सिद्धियों को जाना गया है, जिनमें से 4 को काली कुल और छ: को श्रीकुल में रखा गया है।

अघोरी श्‍मशान घाट में तीन तरह से साधना करते हैं- श्‍मशान साधना, शिव साधना, शव साधना। शव साधना के चरम पर मुर्दा बोल उठता है और आपकी इच्छाएं पूरी करता है।

इस साधना में आम लोगों का प्रवेश वर्जित रहता है। ऐसी साधनाएं अक्सर तारापीठ के श्‍मशान, कामाख्या पीठ के श्‍मशान, त्र्यम्‍बकेश्वर और उज्जैन के चक्रतीर्थ के श्‍मशान में होती है।

महानिर्वाण तंत्र में भगवान शिव ने पार्वती जी से कहा कि कलिदोश के कारण द्विज लोग वैदिक कृत्यों के द्वारा युक्ति लाभ करने में समर्थ्य नहीं होंगे. वैदिक कर्म और मंत्र निर्विश सर्प की तरह शक्तिहीन हो जाएगी, तब मानव तंत्रशास्त्र द्वारा कल्याण का मार्ग ढूंढेगा. तंत्र धर्म एक प्राचीन धर्म है।

श्रीमद्भागवत के 11वें तीसरे, स्कंद पुराण के चौथे अध्याय, बह्यपुराण, वाराह पुराण आदि में उल्लेखित है कि देवोपासना तांत्रिक विधि से करनी चाहिए. महाभारत के शांतिपूर्ण, अध्याय 259 तथा अध्याय 284 श्‍लोक 74वां, 120, 122, 124, में इस बात की चर्चा है. शंकर संहिता, स्कंद पुराण के एक भाग एवं रामायण में भी तांत्रिक उपासना का उल्लेख है।

शिव के अहंकार को मिटाने के लिए माता पार्वती ने उन्हें दशों दिशाओं में काली, तारा, षोडशी, भुवनेश्‍वरी, बगंलामुखी, भैरवी, कमला, धूमावती, मातंगी, छिन्नमस्तका के रूप में दर्शन दिया. इस तरह दश विद्याओं द्वारा शक्ति का अवतरण शिव का अहंकार नाश करने वाला हुआ. मां तारा दश विद्या की अधिष्ठात्री देवी है।

प्राचीन तंत्र ग्रंथों में दस महाविद्याओं का उल्लेख मिलता है। उनमें से एक है बगलामुखी। मां भगवती बगलामुखी का महत्त्व समस्त देवियों में सबसे विशिष्ट है।।ध्यान रखें पूरी साधना के दौरान किसी अन्य व्यक्ति को इस बात की भनक भी नहीं लगनी चाहिए कि आप बगलामुखी साधना कर रहे हैं।

बगलामुखी साधना बहुत कठोर होती है क्योंकि इस दौरान साधक को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना होता है। इतना कि किसी स्त्री का ख्याल या उसका स्पर्श तक ना हो। इसके अलावा किसी डरपोक व्यक्ति, जिसे अंधेरे और पारलौकिक ताकतों से डर लगता है, को भी यह साधना नहीं करनी चाहिए क्योंकि साधना के दौरान कई अजीबोगरीब चीजों से सामना होता है।।

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