मुहल्ले वालों के सहारे नब्बे वर्षीय मुमताज़ जहाँ उर्फ मुन्नन बीबी रख रहीं रोज़ा

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) । दायरा शाह अजमल मे मज़ार पर रहकर ज़िन्दगी के आखरी पड़ाव काट रही नब्बे वर्षीय मुमताज़ जहाँ उर्फ मुन्नन बीबी की दूनिया भी अजब निराली है। घर बेटा बहु होने के बाद भी बेघर सी ज़िन्दगी काटने पर मजबूर हैं।उम्मुल बनीन सोसाईटी के महासचिव सै०मो०अस्करी के मुताबिक़ प्रतिदिन इन बुढ़ी आँखों से न दिखने और न ही चलने की सहुलियत रखने वाली इस बुढ़ी औरत को मुहल्ले की रहने वाली कुछ औरतें और बच्चीयाँ सहरी के वक़्त पानी से मुँह धुलाती और दूध पावरोटी तो कभी चाय और दूसरे खाने के सामान देती देखी जा सकती हैं।वहीं इफ्तारी के वक़्त इफ्तार कराना भी इन्ही मोहल्ले की औरतों और बच्चीयों के सहारे अन्जाम दिया जाता है।अस्करी ने बताया की मैं रोज़ सुबहा सहरी और इफ्तार के वक़्त ऐसा नज़ारा देखा करता था तो जिज्ञासा हुई तो आज इन मुहल्ले की बच्चीयों से इनके बारे मे जानने की कोशिश की।

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