
चक शिया जामा मस्जिद मे 29 अप्रैल जुम्मतुल विदा की नमाज़
(अनुराग शुक्ला )
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) । माहे रमज़ान की उन्तिस रविवार 1-मई को मस्जिद क़ाज़ी साहब बख्शी बाज़ार मे बेहतरीन क़िरत मे अज़ान देने वाले बच्चों की प्रतियोगिता रखी गई। जिसमे मस्जिद कमेटी व ओलमाओं की मौजूदगी मे सब से अच्छी अज़ान पढ़ने वाले को सम्मानित किया जायगा। मौलाना जव्वादुल हैदर रिज़वी के मुताबिक़15 वर्ष के अन्दर के बच्चे ही इस मुक़ाबले मे हिस्सा ले सकते हैं। जो बच्चे हिस्सा लेना चाहते हों वह मस्जिद क़ाज़ी साहब के मुतावल्ली शाहरुक़ क़ाज़ी या मुझ से मिल कर अपनी उम्र का कोई भी सबूत पेश कर मुक़ाबले मे शामिल हो सकते हैं। माहे रमज़ान के बीस रोज़े मुकम्मल हो गए।अब दस दिन के रमज़ान और रोज़े बाक़ी हैं।इन दिनो रोज़ादार ज़्यादा से ज़्यादा गुनाहों की तौबा ,क़ुरआन की तिलावत ,तसबीहे फात्मी, नमाज़ ए पंचगाना के साथ नफिल व वित्र के साथ नमाज़े शब व आमाल मे दिन रात मशग़ूल हैं ।जिससे अल्लाह को खुश कर और अपनी बन्दगी का बेहतर तरीक़े अज्र हासिल कर सकें।आज माहे रमज़ान का तीसरा जुमा था तो हर तरफ लक़ दक़ सफेद कुर्ता पैजामा और टोपी मे नमाज़ी मस्जिदों मे वक़्ते नमाज़ ए जुमा जमा होते रहे। चौक जामा मस्जिद ,रौशन बाग़ शाह वसीउल्लाह मस्जिद ,चक शिया जामा मस्जिद ,मस्जिद ए खदीजा करैली के साथ रेलवे स्टेशन की दोनो बड़ी मस्जिदों ,दायरा शाह अजमल की खानकाह मस्जिद ,धोबीघाट की हरी मस्जिद ,अटाला ,बैदन टोला बख्शीबाज़ार रानीमण्डी मिन्हाजपूर सब्ज़ी मण्डी ,बरनतला,शाहनूर अलीगंज ,बड़ा ताज़िया अकबरपूर बहादुरगंज, हटिया ,रसूलपूर ,हसन मंज़िन समदाबाद नूरउल्लाह रोड समेत अन्य मुहल्लों की सभी छोटी बड़ी मस्जिदों मे ओलमाओं के खुतबे के साथ जुमा की नमाज़ अक़ीदत व ऐहतेराम के साथ अदा की गई।
शहीदे कूफा हज़रत अली इब्ने अबुतालिब की शहादत की शब मुस्लिम इलाक़ो मे फिज़ाओं मे या अली मौला हैदर मौला की सदा गूँजती रही।कहीं महीलाओं की मजलिस हुई तो कहीं पुरुषों की।करैलाबाग़ मे मस्जिद मुसल्ला ए ज़ीशान मे बाद नमाज़ मग़राबैन मस्जिद सहित आस पास के घरों की लाईटों को सोग के माहौल मे बन्द कर मजलिस का आग़ाज़ किया गया।शहनशाह हुसैन सोनवी ने ग़मगीन मर्सियाख्वानी की तो मस्जिद के पेश इमाम व मौलाना आमिरुर रिज़वी साहब क़िबला ने शहीदे कूफा हज़रत अली के करामात और उनकी जिन्दगी पर विस्तार से रौशनी डाली।जब मौलाना ने मसाएब पढ़ना शुरु किया तो हर तरफ से आहो बुका की सदा गूँजने लगी।मोमबत्ती की रौशनी मे शबीहे ताबूत को लोगों के ज़ियारत को निकाला गया।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के नौहाख्वान शादाब ज़मन ,शबीह अब्बास ,ज़हीर अब्बास ,ऐजाज़ नक़वी ,कामरान रिज़वी आदि ने तालिब इलाहाबादी का लिखा नौहा पढ़ा।वहीं रानीमण्डी मे कोठी नवाब नन्हे से असग़र अब्बास की देख रेख मे देर रात शबे शहादत हज़रत अली पर जुलूस निकाला गया।ताबूत ज़ुलजनाह व अलम भी जुलूस मे शामिल रहे जिस पर रास्ते भर अक़ीदतमन्दों ने बोसा लेकर फूल माला व सूती चादर चढ़ा कर मन्नत व मुरादें मांगी।जुलूस मे अन्जुमन नक़विया ,अन्जुमन अब्बासिया अन्जुमन शब्बीरिया.अन्जुमन मज़लूमिय व अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के सदस्यों ने नौहा और मातम का नज़राना पेश किया।वहीं बिसौना मे मजलिस को मौलाना सैय्यद इतरत हुसैन ने खिताब किया शबीहे ताबूत भी निकाला गया नौहाख्वान सदफ व राजिन्दर रघुवंशी ने पुरदर्द नौहा पढ़ा।दरियाबाद मे इमामबाड़ा मोजिज़नुमा मे और दरिया किनारे बनी दरगाह फातहे फुरात ,करैली लेबर चौराहा मस्जिद ए मोहम्मदी समेत अन्य जगहों पर मजलिस मातम का सिलसिला चलता रहा।अन्जुमन ग़ुन्चा ए क़ासिमया के प्रवक्ता सै०मो०अस्करी के मुताबिक़ दो वर्षों से कोरोना प्रतिबन्ध के कारण किसी भी प्रकार के धार्मिक सामाजिक व राजनैतिक कार्यक्रम जिसमे भीड़ हो ऐसे कार्यक्रम पर प्रतिबन्ध था।इस बार बंदिशों के खत्म होने पर लोग खुले मन से सभी कार्यक्रम मे शरीक हो रहे हैं।