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मेरा धैर्य टूटा तो मैं यहीं प्रयागराज में माँ गंगा की गोंद में जल समाधि ले लूँगा- स्वामी बृज भूषण दास

प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेन्द्रानन्द सरस्वती जी महाराज के निजी सचिव ने बताया महाराज जी का शिविर सदैव पीडब्ल्युडी विभाग के बगल त्रिवेणी मार्ग दक्षिणी पटरी पर लगता रहा है | इस बार लेखपाल प्रेम सिंह ने साजिश करके अपनी स्वार्थपूर्त्ति हेतु उक्त शिविर को नाले में आवन्टित करा दिया है | जब विरोध किया तो प्रेम सिंह ने कहा कि संक्रांति से पहले जमीन समतल करके दे दूँगा, संक्रांति से पहले आप अपना शिविर लगा सकते हैं | किन्तु प्रेम सिंह नहीं चाहते कि शिविर लगे, इसलिए बार-बार आग्रह के बावजूद भी आज तक जमीन समतल नहीं हो पाई | जमीन की जो स्थिति है, उसमे शिविर लगाना सम्भव नहीं है | जबकि मेला प्रबन्धक ने बताया कि उक्त जमीन को समतल करने का आदेश मैंने दे दिया है | प्रेम सिंह के ऊपर न तो मेलाधिकारी के आदेश का कोई प्रभाव पड़ रहा है। और न ही मेला प्रबन्धक का | क्योंकि जो ब्यवहार और कार्य करने का तरीका प्रेम सिंह का है, उससे लगता है कि प्रेम सिंह का पूरा प्रयास है कि शिविर न लगने पाए।
प्रेम सिंह की साजिश के कारण संक्रांति पर्व पर आने वाले श्री काशी सुमेरु पीठ और पूज्य जगद्गुरू शंकराचार्य जी महाराज के भक्तों, शिष्यों और श्रद्धालुओं को कितनी परेशानी होगी।
अत: संक्रांति पर्व पर आने वाले सनातन धर्मावलम्बियों के सकुशल स्नान के पश्चात् १७ जनवरी २०२१ से अपने शिविर के सामने त्रिवेणी मार्ग पर मैं जब तक जमीन समतल नहीं होती, और प्रेम सिंह को मेला के कार्य से हटाकर पूरी साजिश की जाँच सुनिश्चित नहीं की जाती, मैं अनिश्चित कालीन धरना पर बैठूँगा, और यदि मेरा धैर्य टूटा तो मैं यहीं प्रयागराज में माँ गंगा की गोंद में जल समाधि ले लूँगा | क्योंकि जब प्रेम सिंह जैसे लोगों की साजिश के कारण सेवा कार्य नहीं करना है, और न ही अपनी धार्मिक स्वतन्त्रता का पालन कर पाऊँगा, तो फिर इस शरीर का कोई औचित्य नहीं, इसका विसर्जन कर देना ही श्रेयस्कर प्रतीत होता है |

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