
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) । यूपी राज्य उपभोक्ता आयोग आयोग के न्यायाधीश राजेन्द्र सिंह ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को आदेश दिया कि वह ३० दिन के अन्दर परिवादिनी को उसी मूल्य पर उसी क्षेत्रफल का भूखण्ड दे अन्यथा वह उसके द्वारा जमा की गई धनराशि २९,९२२/- रू० दिनांक ०१-०९-१९९४ से १० प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करे। साथ ही साथ १,५०,०००/- रू० हर्जाना, दिनांक ०१-०९-१९९४ से निर्णय के अनुपालन के दिनांक तक १५,०००/- रू० प्रति माह मय १० प्रतिशत ब्याज के अदा करे और मानसिक यन्त्रणा के मद में २०.०० लाख रू० का भुगतान निर्णय के ३० दिन के अन्दर अदा करे अन्यथा ब्याज की दर १५ प्रतिशत वार्षिक देय होगी।
श्रीमती उर्मिला कुमारी आनन्द ने दिनांक १०अगस्त १९९२ को गाजियाबाद विकास प्राधिकरण की हस्तिनापुर योजना में एक भूखण्ड आबंटित कराया और इसकी धनराशि जमा कर दी। ४० वर्गमीटर के भूखण्ड का आबंटन आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए था। प्राधिकरण ने लगभग ०८ वर्ष पश्चात् २००३ में यह कहा कि वह स्कीम बन्द हो गई है, अत: वह अपना पैसा वापस ले ले। उसे किसी प्रकार का कोई ब्याज नहीं दिया गया और न ही कोई वैकल्पिक भूखण्ड दिया गया। उसके द्वारा जिला फोरम गाजियाबाद में एक परिवाद प्रस्तुत किया गया जिसे जिला फोरम ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि जब स्कीम ही समाप्त हो गई है तब प्राधिकरण भूखण्ड कहॉं से दे।
जिला फोरम के इस निर्णय के विरूद्ध राज्य उपभोक्ता आयोग, उ0प्र0 लखनऊ में अपील प्रस्तुत की गई। दोनों पक्षों को सुनने के बाद राज्य उपभोक्ता आयोग के न्यायाधीश राजेन्द्र सिंह ने यह पाया कि यदि किसी व्यक्ति को कोई भूखण्ड आबंटित किया जाता है तब ०८ साल बाद आबंटन समाप्त करने का कोई औचित्य नहीं है और गाजियाबाद विकास प्राधिकरण का यह दायित्व था कि वह उसे वैकल्पिक भूखण्ड उसी मूल्य पर देता जो नहीं दिया गया। इस प्रकार गाजियाबाद विकास प्राधिकरण ने सेवा में कमी की है।
न्यायाधीश राजेन्द्र सिंह ने गाजियाबाद विकास प्राधिकरण को आदेश दिया कि वह ३० दिन के अन्दर परिवादिनी को उसी मूल्य पर उसी क्षेत्रफल का भूखण्ड दे अन्यथा वह उसके द्वारा जमा की गई धनराशि २९,९२२/- रू० दिनांक ०१-०९-१९९४ से १० प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित वापस करे। साथ ही साथ १,५०,०००/- रू० हर्जाना, दिनांक ०१-०९-१९९४ से निर्णय के अनुपालन के दिनांक तक १५,०००/- रू० प्रति माह मय १० प्रतिशत ब्याज के अदा करे और मानसिक यन्त्रणा के मद में २०.०० लाख रू० का भुगतान निर्णय के ३० दिन के अन्दर अदा करे अन्यथा ब्याज की दर १५ प्रतिशत वार्षिक देय होगी।
मेडिकल लापरवाही में हर्जाना
एक मामले में गर्भपात लापरवाहीपूर्वक किए जाने के कारण महिला श्रीमती मीनाक्षी की की अगले ही दिन मृत्यु हो गई जिसके विषय में सेवा में कमी पाते हुए शाक्य नर्सिंग होम श्रीमती तारा शाक्य और डॉक्टर श्याम सिंह शाक्य, अरूण नगर, जी0टी0रोड, जनपद एटा के विरूद्ध जिला उपभोक्ता फोरम एटा में परिवाद प्रस्तुत किया गया। जिला फोरम ने सुनवाई के पश्चात् डॉक्टर को दोषी पाया। इस निर्णय के विरूद्ध डॉ0 शाक्य ने राज्य उपभोक्ता आयोग, उ0प्र0, लखनऊ में एक अपील प्रस्तुत की।
श्रीमती मीनाक्षी को ०३ माह से गर्भ था और वह गर्भपात कराने के लिए शाक्य नर्सिंग होम दिनांक १३-०३-१९९५ को पहुँची। डॉक्टर शाक्य ने उसे तुरन्त भर्ती कर लिया और उसका लापरवाहीपूर्वक गर्भपात किया जिससे उसी दिन उसकी मृत्यु हो गई। राज्य उपभोक्ता आयोग के न्यायाधीश श्री राजेन्द्र सिंह ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पाया कि नर्सिंग होम और सम्बन्धित डाक्टर द्वारा अत्यधिक लापरवाही बरती गई है। इसके अतिरिक्त मेडिकल टर्मिनेशन आफ प्रिग्नेंसी रूल २००३ का कोई अनुपालन नहीं किया गया। राज्य उपभोक्ता आयोग द्वारा कहा गया कि यदि डॉक्टर इस केस को लेने के लिए समर्थ नहीं था या उन्हें शंका थी तब उन्हें चाहिए था कि इस मामले को किसी उच्चीकृत अस्पताल को भेजते, जहॉं पर महिला की समुचित चिकित्सा होती किन्तु लालच में और आनन-फानन में लापरवाहीपूर्वक उस महिला का गर्भपात किया गया जिससे उसकी उसी दिन मृत्यु हो गई। राज्य आयोग ने जिला फोरम के निर्णय पर विश्वास करते हुए नर्सिंगहोम और डाक्टर को आदेश दिया कि वह पीडि़त परिवार को ३,६०,०००/- रू० १२ प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज सहित अदा करें।