प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। ‘निष्ठा और समर्पण से कोई भी काम असम्भव नहीं होता। यह पंडित ठाकुरदत्त मिश्र जी के संघर्षमय जीवन से सहज ही समझा जा सकता है । उन्होंने स्वाध्याय के माध्यम से हिन्दी, संस्कृत, अँगरेजी, बँगला, तेलुगु भाषाओं में तो सिद्धहस्त हुए ही, ‘सरस्वती’ जैसी हिन्दी की ऐतिहासिक पत्रिका के सम्पादन में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान देकर साहित्य-जगत में अलग स्थान बनाया । ऐसे ऋषि-स्वरूप मनीषी का स्मरण करना वास्तव में साहित्य-पत्रकारिता-
संस्कृति के इतिहास के स्वर्णिम अध्याय से रूबरू होना है ।
उक्त विचार रहे साहित्य अनुरागियों के जो आज ख्यातिलब्ध साहित्यकार पंडित ठाकुरदत्त मिश्र जी के
१२१ वें जन्म-दिवस के अवसर पर आयोजित स्मृति-गोष्ठी में सम्मिलित हुए । गोष्ठी पुराना कटरा के विश्वविद्यालय मार्ग स्थित ‘चन्द्रानीड’ भवन में सम्पन्न हुई।