जिला पंचायत के चुनाव में कांग्रेस का दबदबा

 

कांग्रेस के खाते में 11 सीटें, तो दो पर सिमटती भाजपा

सिंगरौली (अनुराग दर्शन समाचार )। जिला पंचायत के चुनाव में इस बार कांग्रेस समर्थित उम्मीदवारों का दबदबा देखने को मिल रहा है जबकि देश तथा प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार के लिए बड़ा झटका लगता प्रतीत हो रहा है। जिला पंचायत के चुनाव परिणाम आधिकारिक रूप से तो 14,15जुलाई को आयेंगे परन्तु पोलिंग बूथों पर प्राप्त मतों की संख्या के आधार पर उम्मीदवार अपने-अपने जीत के दावे कर रहे हैं। रूझानों के मुताबिक प्रदेश की सत्तारूढ भाजपा सरकार को जोर का झटका दिया है। भाजपा के हाथ से जिला पंचायत अध्यक्ष का ताज भी छिनता नजर आ रहा है। बताया जाता है कि जिला पंचायत सिंगरौली के 14 वार्डो में से 11 वार्डो में कांग्रेस, 2 में भाजपा और 1 सीट आम आदमी पार्टी के खाते में जा रही है। पोलिंग बूथों के रूझानों के मुताबिक जिला पंचायत के वार्ड क्रमांक 1 उर्ति सामान्य सीट से संदीप शाह आम आदमी पार्टी सर्मथित, वार्ड क्रमांक 2 कोयलखूथ सामान्य महिला सीट से उषा शाह भाजपा समर्थित, वार्ड क्रमांक 3 पोडी नौगई अनुसूचित जाति सीट से राजेन्द्र वर्मा कांग्रेस समर्थित, वार्ड क्रमांक 4 लंघाडोल अनुसूचित जनजाति महिला सीट से सरोज सिंह पति सुरेन्द्र सिंह कांग्रेस समर्थित, वार्ड क्रमांक 5 खनुआ नयाटोला अनुसूचित जाति महिला सीट से सविता प्रजापति, वार्ड क्रमांक 6 ओडगडी अनुसूचित जनजाति राय सिंह मरावी, वार्ड क्रमांक 7 बरका अनुसूचित जनजाति महिला सीट से सोनम सिंह कांग्रेस समर्थित, वार्ड क्रमांक 8 महुआ गांव अनुसूचित जनजाति महिला से सरोज सिंह, वार्ड क्रमांक 9 नौढिया आबाद सामान्य महिला सीट से चमेली घनश्याम पाठक कांग्रेस समर्थित, वार्ड क्रमांक 10 कुलकवार सामान्य महिला सीट से अर्चना नागेन्द्र सिंह, वार्ड क्रमांक 11 ओडनी सामान्य सीट से सोमदेव ब्रम्ह कांग्रेस समर्थित, वार्ड क्रमांक 12 गीर अनुसूचित जनजाति सीट से अशोक सिंह पैगाम कांग्रेस समर्थित, वार्ड क्रमांक 13 नौढिया सामान्य महिला सीट से गीता यादव भाजपा समर्थित, वार्ड क्रमांक 14 चितरंगी सामान्य सीट से कमलेन्द्र सिंह कांग्रेस समर्थित अपनी-अपनी जीत के दावे कर रहें है। जिससे साफ होता दिखाई दे रहा है कि आसन्न विधानसभा चुनाव के सेमी फाइनल में गांव की सरकार में कांग्रेस के पंजे की पकड मजबूत होती दिखाई दे रही है। इधर आम आदमी पार्टी की धमक भी सत्तारूढ पार्टी को चिंता में डालती नजर आ रही है। लोगों में चर्चा का विषय है कि क्षेत्रीय नेता पार्टी की एक जुटता बनाये रखने के बजाय आपस में ही चुनाव लड रहे थें। मसलन भाजपा- भाजपा से चुनावी मैदान में जंग लडते रहे। जिससे भाजपा को गांव की सरकार में ही शिकस्त खाना पड़ रहा है। और प्रदेश के नेता समन्वय बनाने की बजाय महानगरों -नगरो के वातानूकुलित कमरो और कारो से बाहर निकलने में गुरेज कर रहे थें। परिणामस्वरूप भाजपा के हाथ से जिला पंचायत अध्यक्ष का ताज भी पंजें की पकड में जाता दिखाई दे रहा है। मसलन अब जिले की 80 फीसदी गांव सरकार पर कांग्रेस का राज होगा!

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