नए कप्तान को कई चुनौतियों से होगा जूझना

 

कानून के साथ महकमे की अंदरूनी व्यवस्था अहम

गैर जनपद तबादले के बाद भी जमे हैं कई थानाध्यक्ष व चौकी प्रभारी

प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार ) । जनपद के नए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के सामने कई बड़ी चुनौतियां हैं। अटाला में हुए दंगे के बाद कानून ब्यवस्था बनाए रखने के साथ इसकी पुनरावृत्ति नही हो ,इसके लिए अति संवेनशील जगहों पर चौकसी बढ़ाने के साथ चौकन्ना रहना होगा।इससे भी बड़ी चुनौती महकमे के अंदरूनी व्यवस्था की हैं,जहां कई अंडर ट्रांसफर थानाध्यक्ष व्यवस्था सँभाल रहे हैं। जुमे की नमाज के बाद अटाला में नमाजियों द्वारा किये गए तांडव से जनपद की कानून व्यवस्था पर सवाल उठने लगे।बवाल की पूर्व आशंका को लेकर निवर्तमान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय कुमार पांडेय की हर रणनीति फेल हो गयी और ब्यवस्था को मिली खुली चुनौती पर महकमा बैकफुट पर आ गया।दंगाईयों से चोट खाई कप्तान की टीम मोर्चा लेने की जगह शांति के लिए गिड़गिड़ाती देखी गयी।इस स्थिति में स्पष्ट था कि निवर्तमान कप्तान श्री पांडेय में दंगा नियंत्रित करने की रणनीति और जज्बे दोनो का अभाव रहा। इस विषम स्थिति में उनकी दूरदर्शिता किसी स्तर पर नही नजर आयी।उनके सामने उनके अधिकारी और मातहत पिट रहे थे और वह किंकर्तब्य बन कर कानून व्यवस्था को तार तार होते देख रहे थे। निवर्तमान कप्तान के रणनीतिक संयोजन के फेल होने के पीछे महकमे के कई अंडर ट्रांसफर थानाध्यक्ष भी हैं, थानाध्यक्ष मेजा, शंकरगढ़, लालापुर, कौंधियारा, जिनकी विश्वसनीयता जनपद और अधिकारी को लेकर कमतर हुई है। यमुनापार,गंगापार और शहर के कई थानाध्यक्ष और चौकी प्रभारी पर ऐसे लोग अब भी जमे हुए हैं। गैर जनपद तबादले की लटकती तलवार से उनके कार्य व्यवहार में बडा बदलाव देखा जा रहा है।जिसका सीधा असर जनपद की कानून व्यवस्था और भ्र्रष्टाचार को लेकर साफ नजर आया। निवर्तमान कप्तान ने जनता से संवाद कायम करने से गुरेज करते रहे।जनपद में रहे वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सर्वश्रेष्ठ त्रिपाठी ने जन संवाद के जरिये जिले की कानून ब्यवस्था के लिए एक नजीर कायम की थी। नए कप्तान को एक नई लकीर खींचने के लिए आंखे खुली रखनी होगी।

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