सोम प्रदोष का बन रहा विशेष संयोग, शिवालयों में उमड़ेंगे भक्त- आचार्य सोनू जी महाराज

प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार )। कामिका एकादशी रविवार को तीन शुभ संयोग में मनाई जाएगी। अगले दिन सोमवार 25 जुलाई को सोम प्रदोष का विशेष शुभ संयोग रहेगा। इस दिन शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। आचार्य सोनू जी महाराज के मुताबिक सावन महीने के कृष्ण पख की एकादशी रविवार 24 जुलाई को वृद्धि योग, धु्रव योग और द्विपुष्कर योग रहेगा। सुबह से दोपहर दो बजे तक वृद्धि योग, इसके बाद ध्रुव योग शुरु होगा। रात में दस बजे से द्विपुष्कर योग शुरु होगा, जो अगले दिन सुबह 5:55 बजे तक रहेगा।

*पूरी होगी मनोकामनाएं*

इन योगों में किए गए व्रत-उपवास से भक्तों की मनोकामनाएं जल्दी पूरी हो सकती हैं। सावन महीने की एकादशी और इन तीन शुभ योगों में पूजा-पाठ के साथ ही ध्यान भी करना चाहिए। ध्यान अपने इष्टदेव का किया जा सकता है। आप चाहें तो मंत्र जपते हुए ध्यान कर सकते हैं। दीपक जलाकर उसकी ज्योति को देखते हुए ध्यान कर सकते हैं। श्रीहरि को तुलसी के साथ लगाए भोग : एकादशी पर भगवान श्रीहरि के लिए व्रत-उपवास किया जाता है। सावन महीने की इस एकादशी पर विष्णु जी के साथ ही शिव जी की भी विशेष पूजा जरूर करें। भगवान विष्णु का दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक करें। अभिषेक के लिए दूध में केसर मिलाएं और इस दूध को शंख में भरकर भगवान को चढ़ाएं। इस दौरान ऊँ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र का जप करना चाहिए। भगवान को पीले चमकीले वस्त्र चढ़ाएं। फूलों से श्रृंगार करें। दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं। धूप-दीप जलाकर आरती करें।

*व्रत रखने से पुराने पापों का असर होता है कम*

मान्यता है कि इस व्रत से भगवान विष्णु बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं। जीवन से पुराने पापों का असर कम होता है। जिन लोगों को कुंडली में पितृ दोष है या किसी अन्य ग्रह का दोष है तो उस दोष का प्रभाव कम होता है। एकादशी व्रत करने वाले भक्तों को अन्न का सेवन नहीं करना चाहिए। इस दिन फलाहार करें और दूध का सेवन करें। विष्णु जी के सामने गाय के दूध से बने घी का दीपक जलाना चाहिए। एक कथा के अनुसार पुराने समय में एक क्षत्रिय ने यह व्रत किया था तो उसे पापों से मुति मिल गर्ठ थी और सपने में भगवान विष्णु ने उसे दर्शन दिए थे।

*सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि योग में सावन माह का पहला प्रदोष व्रत*

रावण कृष्ण पक्ष 12 सोमवार प्रदोष व्रत के साथ सावन का दूसरा सोमवार का व्रत सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग में 25 जुलाई को मनाया जाएगा। रुद्राभिशेक के साथ शिवालयों में भगवान शिव की पूजा-पाठ की जाएगी। हर-हर महादेव ऊँ नम: शिवाय का जाप किया जाएगा। शिवालयों में मेले लगेंगे व भक्तों का सैलाब उमड़ेगा। प्रदोष व्रत के पूजा शाम के समय प्रदोष काल में की जाती है, इसलिए सावन का पहला प्रदोष 25 जुलाई, सोमवार को रखा जाएगा। इसी दिन का पूजन मुहूर्त शाम 7.17 बजे से रात 9.21 बजे तक रहेगा।

 

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