शरीर और जीवन अपने परमात्मा के काम ना आए वह किस काम की-स्वामी रामकमल दास वेदांती

शरीर और जीवन अपने परमात्मा के काम ना आए वह किस काम की-स्वामी रामकमल दास वेदांती

( अनुराग शुक्ला )प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार ) । श्री सतुआ बाबा सेवा शिविर महावीर मार्ग खाक चौक में नव दिवसीय श्री राम कथा में शिवतत्व की ब्याख्या करते हुए श्रीमद जगद्गुरु अनंतानंद द्वाराचार्य डा स्वामी रामकमल दास वेदांती जी महाराज ने भक्ति निष्ठा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अपने इष्ट में निष्ठा अनन्य एवं प्रगाढ़ होनी चाहिए। भगवान शिव की सती ने जब सीता का रूप धारण कर भगवान राम की परिक्षा ली तो उन्होंने भगवान शिव के आराध्य का अपमान कर दिया। भगवान शिव की उपासना इतनी उंची है कि जो शरीर उनकी इष्ट देवी सीता जी का रूप धारण कर ले वह शरीर उनके लिए भगवती सीता के समान ही पूज्य हो जाता है। इसी कारण से भगवान शिव ने मानसिक दृढ़ संकल्प कर के सती जी का मन से त्याग कर अखंड समाधि ले ली। इससे भगवान शिव में अनन्य प्रेम करने वाली श्री सती जी बड़ी दुखी हुईं और उन्होंने चिंतन क्रिया किया की जो शरीर और जीवन अपने परमात्मा के काम ना आए वह किस काम की। कथा से पूर्व कथा के यजमान सतीश मिश्र ने ब्यास पीठ पर विराजमान पूज्य स्वामी वेदांती जी महाराज का पूजन किया। महामंडलेश्वर श्री सतुआ बाबा श्री संतोष दास जी महाराज ने माल्यार्पण कर स्वागत किया।
ब्यवस्था संचालक पं सुनिल शास्त्री जी ने बताया कि देश विदेश से पधारे हजारों श्रद्धालुओं ने मौनी अमावस्या पर संगम स्नान करने के उपरांत रामकथा सुन रहे हैं, ।यह कथा आगामी 24 जनवरी तक दोपहर 2 बजे से सायं पांच बजे तक चल रही है।

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