
Ati Ahamad And Brother Ashraf Murder: अतीक अहमद और भाई अशरफ की गोली मारकर हत्या, दहला प्रयागराज। माफिया अतीक अहमद और अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी गई। अतीक, अशरफ को गोली मारने वाले आरोपियों ने सरेंडर किया, मीडिया कर्मी बनकर आये थे ।
आरोपियों के नाम लवलेश तिवारी, सनी और अरुण मौर्य तीनों हमलावरों ने भरी पुलिस कस्टडी के बीच में गोली मारकर अतीक और उसके भाई अशरफ को मौत के घट उत्तर दिया।
जानिए अतीक के आतंक की पूरी कहानी …
असद को किसी खाड़ी देश भेजने का था प्लान
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। बहुचर्चित उमेश पाल हत्यकाण्ड के बाद माफिया अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन बेटे असद की सुरक्षा को लेकर चिंतित थी। उसे डर था कि वह पुलिस के हाथ न लग जाय। इसलिए उसने अतीक के खास शूटर गुलाम को असद के सुरक्षा की जिम्मेदारी दी थी। उसने गुलाम को साफ तौर पर कहा था कि किसी भी हाल में असद को अकेला नहीं छोड़ना, असद अभी मासूम बच्चा है। शाइस्ता ने गुलाम को इसकी जिम्मेदारी देते हुए कहा था कि उसके साथ रहकर ही उसे बाहर निकालो। असद की सुरक्षा के लिए शाइस्ता परवीन ने पति अतीक अहमद से भी बात की थी। असद को कुछ समय के लिए किसी खाड़ी देश भेज दिया जाय लेकिन पासपोर्ट आदि अड़चनों की वजह से ऐसा नहीं हो सका। ऐसे में शाइस्ता ने प्रयास किया कि कुछ समय के लिए असद को नेपाल में छिपाया जाय। इस बात का खुलासा अतीक और अशरफ से की जा रही पुलिस की पूछताछ में हुआ है।
*बेटे के जनाजे में न जा पाने से गम और गुस्से में अतीक*
बेटे के जनाजे में शामिल नहीं हो पाने के कारण अतीक को गम और गुस्सा दोनों है। शनिवार को पुलिस की पूछताछ में यह साफ दिखा। पूछताछ में वह पुलिस के सवालों का जवाब नहीं दे रहा था। जिन सवालों पर बोला भी तो सिर्फ इतना कि उसे कुछ नहीं मालूम। ‘अतीक ने कहा कि आज मुझे तन्हा रहने दो’। बेटे के जनाजे तक में जाने नहीं दिया, आखिरी वक्त में भी देख नहीं पाया। उसने यह भी कहा कि ‘कल ही तो इतनी पूछताछ की थी, आज मुझे बेटे की यादों के साथ तनहा छोड़ दो। उमेश पाल हत्या मामले में पुलिस धूमनगंज थाने में अतीक और अशरफ से अलग- अलग पूछताछ कर रही है।
*अतीक को बेटे की मौत का मलाल*
पुलिस सूत्रों के मुताबिक अतीक को बेटे असद की मौत का मलाल है। बेटे की मौत के लिए वह खुद को जिम्मेदार मान रहा। वह बेटे के जनाजे में शामिल होकर दो मुठ्ठी मिट्टी डालना चाहता था।
इसके लिए उसने शुक्रवार को रिमांड मजिस्ट्रेट के समक्ष अर्जी भी दाखिल की थी, लेकिन वहां से अर्जी खारिज हो गई। शनिवार को कोर्ट खुलने से पहले ही उसके बेटे असद को दफन कर दिया गया। इसकी वजह से वह अपने बेटे के जनाजे को कंधा भी नहीं दे पाया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक शनिवार की सुबह जैसे अतीक से पूछताछ शुरू हुई, उसने टेबल पर सिर रख दिया. कहा कि ‘तुम लोगों ने मुझे अपने प्यारे बेटे के जनाजे तक भी नहीं जाने दिया, मैं उसे आखिरी वक्त पर देख भी नहीं पाया’। यह कह कर उसने पुलिस के सामने खामोश हो गया। पुलिस अधिकारी एक के बाद एक सवाल पूछते रहे, लेकिन वह ज्यादातर सवालों का जवाब देने के बजाय चुप रहा। जिन सवालों पर उसने मुंह खोला भी तो यही कहा कि उसे कुछ नहीं पता। उधर, दूसरे कक्ष में पुलिस की दूसरी टीम अशरफ से पूछताछ कर रही थी। अशरफ ने कई सवालों के जवाब दिए हैं. हालांकि उसके भी जवाब संतोषजनक नहीं थे। बता दें कि 24 फरवरी को हुए उमेश पाल हत्याकांड में अतीक और अशरफ मुख्य आरोपी और रणनीतिकार हैं। जबकि अतीक के बेटे असद, शूटर गुलाम समेत सात बदमाशों ने वारदात को अंजाम दिया। पुलिस अब तक वारदात को अंजाम देने वाले चार बदमाशों को एनकाउंटर में ढेर कर चुकी है। तीन शूटरों गुड्डू मुस्लिम, अरमान और साबिर की तलाश जारी है। अतीक की पत्नी शाइस्ता समेत अन्य आरोपी फरार हैं। इनकी भी तलाश की जा रही है।
*अजमेर पहुंचने पर ‘डी कंपनी’ से मिली मदद*
उमेश पाल हत्याकांड के बाद 25 दिनों तक अतीक अहमद का बेटा असद प्रयागराज से कानपूर, कानपुर से नोएडा, नोएडा से दिल्ली, दिल्ली से अजमेर, अजमेर से नासिक, नासिक से पुणे भागता रहा और आखिर में गुरुवार को पुलिस एनकाउंटर में मारा गया। दिल्ली के संगम विहार में रहने में उसे एक नेता की मदद मिली। लेकिन यहां भी उसे सेफ महसूस नहीं हुआ तो वह 14 मार्च को अजमेर गया। इसके बाद असद को छुपने के लिए अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी के सदस्य अबू सलेम के करीबियों की मदद मिलनी शुरू हुई। यह भी पता चला है कि जब असद अजमेर में था तब उसे बरेली जेल से चाचा अशरफ ने फेसटाइम ऐप के जरिए संपर्क किया था और नासिक निकल जाने को कहा था।सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में यह बात भी पता चली है कि डी कंपनी और अबू सलेम से अतीक का सपंर्क माफिया मुख्तार ने कराया। गौरतलब है कि आजमगढ़ का रहने वालाअबू सलेम डी कंपनी का सदस्य है।
*दाऊद के जरिए जुड़े पाकिस्तान से तार*
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। मुख्तार अंसारी की मदद से अतीक अहमद का दाऊद इब्राहिम गैंग से सम्पर्क होने के तार पाकिस्तान से जुड़ गया। इसके बाद अतीक गैंग ने पाकिस्तान से हथियार मंगवाये। असद और शूटर गुलाम के एनकाउंटर में एसटीएफ को विदेशी हथियार बरामद हुए हैं।
*बारह बीघे उपजाऊ जमीन छीना फिर पति को गायब करवा दिया*
*बेटे पर फायरिंग फिर घर में घुसकर कई बार पीटा*
*अतीक अहमद से 33 साल से लड़ रहीं जयश्री कुशवाहा*
प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार )। प्रदेश की योगी सरकार द्वारा माफिया अतीक के खिलाफ की जा रही प्रभावी कार्रवाई से उसके द्वारा सताए गए लोगों को साहस मिला है। वह खुलकर सामने भी आ रहे हैं और अतीक के जुल्मों की कहानी भी बयां कर रहे हैं। अतीक के जुल्मों का शिकार हुए लोगों में एक नाम धूमनगंज के झलवा की रहने वाली सूरजकली कुशवाहा उर्फ़ जयश्री कुशवाहा का है।
60 साल की हो चुकीं जयश्री ने बताया कि वह बीते 33 वर्षों से अतीक अहमद से कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं। जयश्री के मुताबिक अतीक ने पहले उनकी 12 बीघा जमीन कब्जा कर ली फिर उनके पति को गायब करा दिया। इतने पर भी उसका मन नहीं भरा तो उनके बेटे पर गोली चलवाई और कई बार उसके गुर्गे घर में घुसकर मारपीट किये। अनेकों बार तरह-तरह से धमकाया गया। इन सब के बावजूद भी वह आतंक के पर्याय रहे अतीक से लड़ती रहीं। जयश्री ने बताया कि उनके पति 15 साल से गायब हैं।कानूनन कोई 10 साल से ज्यादा गायब रहता है तब उसे फाइलों में मृत घोषित कर दिया जाता है।
जयश्री के पति बृजमोहन कुशवाहा के पास 12 बीघा से अधिक जमीन थी। जिस पर खेती होती थी। इसी से परिवार का भरण-पोषण हो रहा था। लेकिन एक दिन अचानक सब कुछ बदल गया। जयश्री के पति गायब हो गए। जमीन पर अतीक का कब्जा हो गया। जयश्री बताती हैं कि अतीक के पिता फिरोज के पास लाल रंग का एक ट्रैक्टर था। इस ट्रैक्टर से किसानों के खेतों की जुताई-बुवाई होती थी। यही ट्रैक्टर उनके खेत में भी चलता था। उनकी जमीन देखकर अतीक के मन में लालच आ गया। एक दिन अतीक का करीबी लेखपाल मानिकचंद श्रीवास्तव उनके पास आया और कहा कि उनकी जमीन शिवकोटी सहकारी आवास समिति के नाम पर दर्ज हो गई है। यह समिति अतीक अहमद द्वारा बनायी गयी थी।
अतीक ने इसमें दो लोगों को सचिव बनाया और जमीन को बेचना शुरू कर दिया। जयश्री के अनुसार 1989 में एक दिन उनके पति अचानक गायब हो गए। वह कहाँ गए किसी को पता नहीं। कुछ समय बाद उन्हें पता चला कि जमीन अब उनकी नहीं रही। जमीन जयश्री और उनके परिवार के जीवनयापन का सबसे बड़ा सहारा थी। इसलिए उन्होंने गाँव वालों से सहायता माँगी और अपनी जमीन वापस पाने के लिए कोर्ट में वाद दाखिल कर दिया। उन्हें यह पता चल गया था कि जमीन हड़पने का पूरा खेल अतीक अहमद का था। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी। जयश्री ने बताया कि जब उनकी जमीन हड़पी गई, तब अतीक अहमद विधायक था। उसने कई बार उन्हें अपने कार्यालय में बुलाया। अतीक के बुलावे पर जब वह पहली बार गईं तो उसने कहा कि तुम्हारा पति मेरा बहुत खास था। अब नहीं रहा। इसलिए अब तुम्हारे परिवार की जिम्मेदारी मेरी है। अपनी जमीन दे दो और घर में रहो। उन्होंने इनकार किया तो अतीक भड़क गया और कहा कि जिस तरह तुम्हारे पति को गायब करवाया हूँ, उसी तरह तुमको भी गायब करवा दूँगा। इसके बाद अतीक के गुर्गों ने कई बार घर में घुसकर उनके साथ मारपीट की। उसके गुर्गे उन्हें लगातार धमकी देते रहे। जयश्री अपने भाई प्रह्लाद कुशवाहा की करेंट लगने से हुई मौत के लिए भी अतीक अहमद को जिम्मेदार मानती हैं। उनका कहना है कि बीते 30 सालों में उनपर सात बार हमला हुआ। साल 2016 में उनके घर के सामने बेटे और परिवार पर हमला हुआ। इसमें उनके बेटे को गोली लगी थी। गनीमत रही कि बेटे की जान बच गई। जयश्री के अनुसार वह कई सालों तक कोर्ट और थाने के चक्कर काटती रहीं। लेकिन अतीक के खिलाफ कहीं भी सुनवाई नहीं हो रही थी। साल 1991 में उन्हें अतीक के खिलाफ पहली एफआईआर दर्ज कराने में सफलता मिली। लेकिन साल 2001 में आरोपों को निराधार बताकर केस बंद कर दिया गया। वर्ष 2005 में जयश्री को बड़ी सफलता मिली। सीलिंग एक्ट से अनुमति नहीं मिलने के कारण शिवकोटी सहकारी आवास समिति का नामांतरण रद्द हो गया। इसके बाद जमीन उनके नाम पर दर्ज कर दी गई। साल 2007 में प्रदेश की सियासत में परिवर्तन हुआ। इसके बाद अतीक के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई और कार्रवाई का सिलसिला शुरू हुआ। जयश्री के वकील केके मिश्रा का कहना है कि इस मामले में कुल चार मुकदमे दर्ज किए गए हैं। लेकिन सभी मामलों में अब तक पुलिस विवेचना भी पूरी नहीं हो पाई है। पुलिस ने अतीक और अशरफ के अलावा किसी अन्य आरोपित के खिलाफ चार्जशीट भी दाखिल नहीं की है। जयश्री और उनके परिवार की सुरक्षा को ध्यान में रखकर प्रशासन ने दो जवान तैनात किए हैं। जयश्री के बेटों ने लाइसेंसी हथियार के लिये साल 2020 में आवेदन दिया था, जो अब तक नहीं मिला है।
*खाल खींचकर चौराहे पर फेंका, थाने में फोन करके बोला अतीक- वो अभी जिंदा है, उठा ले जाओ*
प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार )। अतीक का ये सच फिल्मी थ्रिलर से भी ज्यादा खौफनाक लगेगा। पहली बार में इस बात पर यकीन करना मुश्किल है कि फिल्मों में जिस तरह विलेन मार-मारकर किसी की खाल उधेड़कर सड़क पर फेंक देता है, ठीक वैसा ही कभी अतीक ने भी किया था। यह अतीक अहमद का वो खौफ है, जिसके बारे में कम लोग जानते होंगे। ये वो खूंखार घटना है, जिसे कानून के रजिस्टर में दर्ज करने की हिम्मत पुलिस में तब नहीं थी। अतीक अहमद का ऐसा आतंक था कि उस पर नजर उठाने वाले को आंखें निकाल लिए जाने का डर रहता था। इस बात पर यकीन करने के लिए सिर्फ एक घटना ही काफी है। अतीक अहमद ने अपने चकिया इलाके में एक शख्स की खाल उधेड़ दी थी। बात 90 के दशक की है। चांद बाबा की हत्या के कुछ महीने बाद अतीक अहमद का नाम प्रयागराज में खौफ का पर्याय बन चुका था। अतीक अहमद बड़ा बाहुबली बनने की राह पर तेजी से चलने लगा था।
जमीनों पर उसके गैंग के द्वारा अवैध कब्जों की शुरुआत हो चुकी थी। एक शख्स ने जमीन पर कब्जे के एक मामले में उसका विरोध किया और अतीक के गैंग के सामने न झुकने की बात कहकर मुंबई में अपने रिश्तेदार के यहां चला गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक अतीक ने अपने गुर्गे भेजकर उस शख्स को मुंबई से बुलवाया। गैंगस्टर अतीक चाहता तो गुर्गों के हाथों उस शख्स को धमकाकर, पिटवाकर अपनी बात मनवा सकता था, लेकिन उसने ऐसा न करके उस युवक को साजिश के तहत चकिया बुलाया।अतीक ने मुंबई से बुलाकर उस युवक को पहले एक होटल में बुरी तरह मारा। दहशतजदा युवक ने माफी मांगते हुए उसे फ्री में अपनी जमीन देने को कहा लेकिन अतीक ने उसकी एक न सुनी। उसने अपने गुर्गों के जरिए युवक के शरीर के एक हिस्से की खाल निकलवा दी। इसके बाद उसे अधमरे हालत में एक चौराहे पर फेंक दिया। अतीक ने वापस घर आकर लैंडलाइन से धूमनगंज थाने में फोन किया। एक पुलिसकर्मी ने फोन उठाया तो अतीक गालियां देते हुए युवक का नाम लेकर बोला, वो चौराहे पर पड़ा है, उसकी खाल निकाल दी है, अभी जिंदा है, ले जाओ।” पुलिस ने युवक को अस्पताल पहुंचाया था। लेकिन आश्चर्य होगा कि इतनी क्रूर घटना की थाने में रिपोर्ट तक दर्ज नहीं हुई। उस वक्त अतीक अहमद विधायक बन चुका था।
*अतीक अहमद पर चांद बाबा की हत्या का केस तक नहीं दर्ज हुआ*
युवक के शरीर से खाल निकालकर चौराहे पर फेंकने वाली घटना से कुछ महीने पहले 1989 में अतीक और चांद बाबा के बीच गैंगवार हुई थी। दोनों गैंगस्टर थे। नवंबर 1989 में लोकसभा चुनावों के साथ विधानसभा चुनाव भी चल रहा था। अतीक अहमद, चांद बाबा को खत्म करने के लिए प्रयास कर रहा था। वोटिंग के बाद काउंटिंग वाले दिन अतीक अहमद अपने गुर्गों के साथ चाय की एक दुकान पर बैठा था।
इसी दौरान गैंगस्टर चांद बाबा भी अपने गुर्गों को लेकर वहां पहुंच गया। दोनों के बीच कहासुनी हुई, गालीगलौज हुई और देखते ही देखते गोलियां चलने लगीं। फायरिंग में चांद बाबा की हत्या हो गई। लेकिन हैरान करने वाली बात रही कि इस मामले में पुलिस अतीक को नामजद नहीं कर सकी। पुलिस कोई कदम उठाती तब तक चुनाव के नतीजे आ चुके थे और गैंगस्टर अतीक अहमद विधायक बन चुका था। पुलिस ने चांद बाबा की मौत को गैंग के आपसी टकराव का नतीजा बताकर रफा-दफा कर दिया। चांद बाबा की हत्या हो या जमीन के झगड़े में युवक की खाल निकालकर उसे सड़क पर फेंक देने का दुस्साहस, हर बार अतीक ने एक ही बात दिखाने और जताने की कोशिश की कि वो दुर्दांत है, वो किसी से नहीं डरता है। न पुलिस, न प्रशासन, न किसी गैंगस्टर और न ही सिस्टम से। हालांकि अब हालात काफी बदल चुके हैं। अतीक सरकार से रहम की भीख मांग रहा और पुलिसकर्मियों के सामने गिड़गिड़ा रहा है।
*असद और गुलाम को किया गया सुपुर्द ए खाक*
प्रयागराज ( अनुराग दर्शन समाचार )। दो दिन पूर्व झांसी में एसटीएफ के साथ कोई मुठभेड़ में मारे गए अतीक अहमद के बेटे असद और उसके शूटर गुलाम हसन को शनिवार को सुपुर्द ए खाक कर दिया गया। असद को जहां कसारी मसारी कब्रिस्तान में दफनाया गया वहीं गुलाम को मेहदौरी कब्रिस्तान में। कड़ी सुरक्षा के बीच सुबह लगभग 9:00 बजे पुलिस और अतीक के रिश्तेदार असद के शव को लेकर प्रयागराज पहुंचे। शव अतीक के पैतृक घर न ले जाकर सीधे कब्रिस्तान ले जाया गया जहां असद के नाना ने जनाजे की जरूरी रस्मों को पूरा किया। इसके बाद असद को दफना दिया गया। असद के जनाजे में उसका कोई अपना परिजन शामिल नहीं था। कुल लगभग 50 लोग शामिल रहे जिसमें अतीक के रिश्तेदार को शुभचिंतक शामिल हैं। पति के पैतृक आवास पर असद के सब के अंतिम दर्शन के लिए महिलाएं भी जुटी थीं। लेकिन पुलिस की सख्ती के चलते सभी को मौका नहीं मिल पाया। पुलिस महिलाओं के आधार कार्ड चेक करने के बाद ही उन्हें आगे जाने दे रही थी। पुलिस ने संदेह के आधार पर दो महिलाओं को हिरासत में भी लिया था जिन्हें बाद में परिचय देने पर जनाजे में शामिल होने की इजाजत दे दी गई। पुलिस ने जिन दो महिलाओं को हिरासत में लिया था उनमें एक अतीक अहमद की बड़ी बहन और दूसरी उसकी भांजी थी। सुरक्षा के लिहाज से अतीक के घर और कब्रिस्तान में बड़ी संख्या में पुलिसबल तैनात किया गया था। महिला पुलिसकर्मियों की भी तैनाती की गई थी। सादे कपड़ों में भी महिला और पुरुष पुलिसकर्मी लगाए गए थे। पुलिस को आशंका थी कि फरार चल रही अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन बेटे के अंतिम दर्शन के लिए आ सकती है। कब्रिस्तान और आसपास के इलाकों की निगरानी ड्रोन कैमरों से भी की जा रही थी। उमेश पाल हत्याकांड में शामिल रहे शूटर और असद के साथ मुठभेड़ में मारे गए गुलाम हसन के शव को उसकी पत्नी और ससुरालवालों ने मेहदौरी कब्रिस्तान में दफन किया। गुलाम की भी जनाजे में गिनती के ही लोग शामिल रहे। गुलाम की मां और भाई ने पहले ही उसके शव को लेने से इनकार कर दिया था।
*बेटे के जनाजे में शामिल होने के लिए गिड़गिड़ाता रहा अतीक*
अतीक अहमद और उसका भाई अशरफ भी असद के जनाजे में शामिल होना चाहते थे लेकिन ऐसा नहीं हो सका। पुलिस रिमांड में रखे गए दोनों भाइयों से धूमनगंज थाने में पूछताछ की जा रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक अतीक अहमद बेटे के जनाजे में शामिल होने के लिए बेचैन था। वह रातभर रोता रहा। अतीक ने पुलिसकर्मियों से बेटे के जनाजे में ले चलने के लिए गिड़गिड़ाता रहा लेकिन उसकी बात अनसुनी कर दी गई। कई बार अतीक पुलिसकर्मियों पर भड़का भी और कई बार बच्चों की तरह जमीन पर लेट गया। शनिवार सुबह जब असद के शव को दफनाया जा रहा था उस वक्त भी अतीक पुलिसकर्मियों से मोबाइल या टीवी पर ही असद के दफनाए जाने को दिखाने की बात कही लेकिन इसे भी स्वीकार नहीं किया गया। वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने कहा कि वह कुछ नहीं कर सकते।
*एटीएस ने की पूछताछ*
अतीक अहमद का आतंकी कनेक्शन सामने आने के बाद एटीएस भी सक्रिय हो गई है। उसकी सात सदस्यीय टीम सोमवार को प्रयागराज पहुंची और धूमनगंज थाने में कई घंटे तक अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ से पूछताछ की। उल्लेखनीय है कि पुलिस की पूछताछ में यह बात सामने आई है कि अतीक अहमद का पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और वहाँ के आतंकी संगठन लश्करे तोइबा से सम्बंध है। अतीक पाकिस्तान से असलहे मंगाता था।
*अतीक अहमद का करीबी गुर्गा असाद कालिया व उसका भाई गिरफ्तार*
*असाद पर था 25 हजार का ईनाम*
प्रयागराज (अनुराग दर्शन समाचार )। शनिवार को अतीक अहमद का एक और करीबी गुर्गा असाद कालिया पुलिस की गिरफ्त में आ गया। उसे एसटीएफ ने 14/15 अप्रैल की रात पुरामुफ्ती थानाक्षेत्र के उमरी गांव से पकड़ा। उस पर 25 हजार का ईनाम घोषित था। काफी दिनों से पुलिस उसकी खोजबीन कर रही थी। उस पर वकील वकार को धमकी देने और 10 लाख रुपए की रंगदारी मांगने का आरोप है। पुलिस ने असाद के भाई फैजान को भी गिरफ्तार किया है। उसका अपराधिक रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है। उल्लेखनीय है कि असाद अतीक गैंग के खास गुर्गों में गिना जाता है। उस पर 12 से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। वर्ष 2016 में सुरजीत अलकमा की हत्या हुई। इसका आरोप अतीक पर लगा। इस हत्याकांड का गवाह धूमनगंज निवासी साबिर था। साबिर को बाद में धमकाया गया। इसमें भी असाद और फैजान का नाम आया। साल 2019 में असाद कालिया ने साबिर से एक करोड़ की रंगदारी मांगी थी।
अतीक अहमद के साढ़ू के भाई जिशान उर्फ जानू ने 31 दिसंबर 2021 को करेली थाने में अतीक अहमद, उसके बेटे अली और असाद कालिया के खिलाफ रंगदारी मांगने और धमकाने का मुकदमा दर्ज कराया था। अली और अतीक अहमद तो गिरफ्तार हुए, लेकिन असाद कालिया भाग गया था। उस पर पुलिस ने 25 हजार रुपए का इनाम भी घोषित कर रखा था। खुल्दाबाद के रहने वाले वकील वकार अहमद ने करेली थाने में तहरीर देकर बताया कि 5 अप्रैल को वह अपने भाई मोहम्मद अहमद के साथ करेली के बीरमपुर में अपने साले के प्लाट पर गए थे। उसी समय दामुपुर का रहने वाला इरशाद और उसके साथ कुछ अज्ञात लोगों ने आकर वकार से पूछताछ शुरू कर दी। सभी ने धमकी दी कि अगर प्लाट चाहिए तो असाद को 10 लाख रुपये देना होगा। पीड़ित अधिवक्ता के मुताबिक, इन लोगों ने पिस्टल सटाकर जान से मारने की धमकी दी। वकार ने बताया कि, दबंगों ने व्हाट्सएप कॉलिंग के जरिए असाद से बात भी कराई थी। उस समय असाद ने धमकी दी थी कि उमेश पाल भी वकालत करता था, लेकिन बच नहीं पाया, इसलिए जो कहा जाए वह करो।
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